घुसपैठियों के लिए जन्नत का दरवाज़ा पश्चिमी सीमा
पिछले बीस सालो में कई कुख्यात तस्कर-जासूस धरे
पिछले बीस सालो में कई कुख्यात तस्कर-जासूस धरे
बाड़मेर। भारत में घुसपैठ का नया अड्डा बाड़मेर बन गया हैं , जिस तरह से पुणे में बम धमाको से मुल्क हिला हैं वैसे ही बाड़मेर में घटनाए होनी शुरू हो जाए तो कोई अचरज नहीं करना चाहिए , सरकार ने बाड़मेर , जैसलमेर , बीकानेर और श्रीगंगानगर में सीमा चौकियां बंद करके देश की सुरक्षा और अस्मत को वैसे भी खतरें में डालने की शुरुवात कर दी हैं , देश की पश्चिमी सीमा से बढ़ती घुसपैठ ने सुरक्षा बलों को परेशान कर दिया है। सीमा पार से आतंकी और तस्कर दोनों ही आ रहे हैं। लाख कोशिशों के बावजूद सुरक्षाबल उन्हें नहीं रोक पा रहे हैं। देश की पश्चिमी सीमा पर कई किलोमीटर तक तारबंदी की गई है। हर वक्त यहां बीएसएफ के जवानों का पहरा होता है। इसके बावजूद तबाही के सामान आरडीएक्स, टाइमर, डेटोनेटर, सेफ्टी फ्यूज, बैटरी और गोला बारूद देश में आ रहा है। जो सन 2009 में यहाँ भारी मात्रा में पकड़ा गया था और इसके साथ पाकिस्तान के लिए काम करने वाले तस्कर और बब्बर खालसा के आतंकवादी का भी पकड़ा जाना इस बात की पुष्टि कर चुका हैं की बाड़मेर अतंका और तस्करों का नया गढ़ बनता जा रहा हैं । दरअसल सीमा पार से आतंकियों ने हिंदुस्तान में दाखिल होने के लिए एक चोर दरवाजा खोज लिया है। याद रहे बाड़मेर के एक गांव में सुरक्षा एजेंसियों को एक खेत से तबाही के सामान के साथ पकड़े गए सोढ़ा खान ने सनसनीखेज खुलासा किया था। सोढ़ा खान के मुताबिक उससे पहले आलिया नाम का शख्स सीमा पार से तबाही का इतना सामान भारत में ला चुका है। जो एक शहर को उडा़ने के लिए काफी है। सोढा खान के बाद उसी की निशानदेही पर पुलिस ने एक और तस्कर यारू खान जैसलमेर को पकड़ा था जिसने पकडे़ जाने के बाद खुलासा किया कि सीमा पार से भारत में 60 करोड़ की हेरोइन आ चुकी है। राजस्थान पुलिस के मुताबिक राजस्थान के रेतीले इलाके से तबाही का सामान देश के भीतर लाना कोई मुश्किल काम नहीं है। ये सामान तारबंदी के नीचे से आ रहा है। इस बात पर पुलिस और सीमा सुरक्षा बल के बीच ठन गई थी ।
बाड़मेर के निवासी और सीमा सुरक्षा बल में कमांडेट रह चुके एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि बाड़मेर से लेकर जैसलमेर तक रेतीली मिट्टी को हटाकर सीमा में दाखिल होना बहुत आसान है। आतंकी इसी रास्ते से बार-बार देश में दाखिल हो रहे हैं। इस मिट्टी को हटाने के लिए किसी फावड़े की जरूरत नहीं पड़ती, हाथ से ही मिट्टी हटाकर कोई भी इस पार आ सकता है। इसके अलावा जैसलमेर में अमूमन रेत के इतने ऊंचे टीले बन जाते हैं कि कोई भी उसके सहारे तारबंदी को पारकर इधर आ सकता है।याद रहे कुछ साल पहले बाड़मेर बॉर्डर के जरिए यारू खां नाम का तस्कर भारत में दाखिल हुआ था। उसके पास से 50 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई। लेकिन 10 किलोग्राम हेरोइन उसने इसी इलाके में कहीं छिपा दी। जिसका पता सुरक्षा एजेंसियां अब तक नहीं लगा पाई हैं।
मालूम हो कि पिछले दो सालो में इस रास्ते से करीब 20 बार घुसपैठ हो चुकी है। बीएसएफ की एक कंपनी के पास करीब 50 किलोमीटर तक सुरक्षा का जिम्मा है। जबकि जम्मू-कश्मीर और पंजाब बॉर्डर पर एक कंपनी के पास महज 5 से 7 किलोमीटर की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है। सरहदी थानों में पुलिस बल और साजो-सामान की कमी ने भी इस इलाके की सुरक्षा को ढीला बना दिया है। अगर इस इलाके में मुस्तैदी न बढ़ाई गई तो आतंकी चोर दरवाजे के सहारे देश में दाखिल होते रहेंगे।
देश की सबसे संवेदनशील मानी जाने वाली थार मरूस्थल बाड़मेर-जैसलमेर से सटी भारत-पाकिस्तान की पश्चिमी सरहद की सुरक्षा खतरे में हैं । यहां न केवल मादक पदार्थो के तस्कर, बल्कि देश के गद्दार बेखौफ होकर अपने नापाक इरादों में कामयाब हो रहे हैं। यहां से सामरिक महत्व की सूचनाएं पाक भेजने के आरोप में जैसलमेर और नाचना इलाके से आईएसआई के तीन एजेंटों के धरे जाने से खुफिया एजेंसियां सकते में हैं। आईबी, सीआईडी व अन्य एजेंसियां इन आरोपियों के जाल में सेंध लगाने के प्रयास में हैं।
वाया अटारी पाक पहुंच रही गुप्त सूचनाएं
पश्चिमी सरहद तारबंदी से पूर्व जासूसों व एजेंसियों के गुर्गो के लिए सैरगाह मानी जाती थी। तारबंदी के अभाव में जासूसों के साथ-साथ तस्कर धोरों में छुपकर सीमा पार आते व जाते थे। तारबंदी के बाद पिछले कई वर्षो से इस पर अंकुश लगा है, लेकिन अब जासूसों ने नया रास्ता अख्तियार कर लिया है। वे पश्चिमी सरहदों से सूचनाएं एकत्रित करने के बाद पंजाब में अटारी के रास्ते एजेंटों को सीमा पार सूचनाएं भिजवा रहे हैं।
भाई-भतीजे और रिश्तेदारों को गैंग में शामिल कर रहे हैं तस्कर
आईएसआई के अधिकारी व एजेंट पश्चिमी सीमा के करीब रहने वालों को मोटी रकम का लालच देकर गद्दारी को तैयार करते हैं। इसके बाद यह लोग अपने रिश्तेदारों को भी गद्दारी के इस खेल में शामिल कर जाल को फैलाने में लग जाते हैं। सीआईडी के हत्थे चढ़े जासूस गुलाम रसूल ने अपने भतीजे मजीद को साथ मिला लिया था यह उससे हुई पूछताछ में सामने आया था । जांच एजेंसियों को आशंका है कि उसके साथ बड़ी संख्या में क्षेत्र के युवा जासूसी में शामिल हो सकते हैं। इस सम्बन्ध में सीआईडी को कुछ संदिग्ध लोगों के नाम भी हाथ लगे हैं, जिनकी तस्दीक की जा रही है।
अवैध रूप से रह रहे हैं विदेशी
पिछले कई वर्षो से पाकिस्तान से आए कई लोग सीमावर्ती जिलों में अवैध रूप से रह रहें हैं। खुफिया एजेंसियां इन पर जासूस होने का संदेह भी जाहिर कर चुकी है। यही नहीं आंकड़े बताते हैं कि सीमावर्ती ईलाको में कई पाकिस्तान के लोग थार एक्सप्रेस से भारत आये और यहीं कहीं वीजा अवधि खत्म होने के बाद छुपे हुए हैं । पाकिस्तानी नागरिको के अलावा काफी बंगलादेशी भी यहाँ अवैध रूप से रहने की आशंका हैं ।
कब-कब कौन पकड़ा गया
दिनांक जासूस
27 मार्च 2000 मुनीर अहमद, रहीमयार खां, पाकिस्तान
27 मार्च 2000 भजनदास चौधरी, गिदरावली, सिरसा
27 मार्च 2001 पठाई खां, राठौड़ों का तला, बाड़मेर
नवम्बर 2001 रमजान, किशनगढ़, जैसलमेर
नवम्बर 2001 नूरे खां, जैसलमेर जिला
12 दिसम्बर 2001 असलम खां, पाकिस्तान
8 सितम्बर 2002 मोहम्मद अली उर्फ अबुल कासम, घाटेल, बांग्लादेश
8 सितम्बर 2002 चन्द्रेश शुक्ला, कटनी, मध्यप्रदेश। फौज का सिपाही व सहयोगी था
13 मार्च 2005 मौला बक्श उर्फ मोलिया, खुइयाला जैसलमेर
19 मार्च 2005 हाजी खां उर्फ हाजीड़ा, सदाराड जैसलमेर
14 दिसम्बर 2005 ऋषि महेन्द्र, हैदराबाद, पाकिस्तान
16 दिसम्बर 2005 परवेज अहमद उर्फ जाहिद अली हैदराबाद पाकिस्तान
13 अगस्त 2006 इनायत उल्ला, साकडिया नाचना जैसलमेर
बाड़मेर के निवासी और सीमा सुरक्षा बल में कमांडेट रह चुके एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि बाड़मेर से लेकर जैसलमेर तक रेतीली मिट्टी को हटाकर सीमा में दाखिल होना बहुत आसान है। आतंकी इसी रास्ते से बार-बार देश में दाखिल हो रहे हैं। इस मिट्टी को हटाने के लिए किसी फावड़े की जरूरत नहीं पड़ती, हाथ से ही मिट्टी हटाकर कोई भी इस पार आ सकता है। इसके अलावा जैसलमेर में अमूमन रेत के इतने ऊंचे टीले बन जाते हैं कि कोई भी उसके सहारे तारबंदी को पारकर इधर आ सकता है।याद रहे कुछ साल पहले बाड़मेर बॉर्डर के जरिए यारू खां नाम का तस्कर भारत में दाखिल हुआ था। उसके पास से 50 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई। लेकिन 10 किलोग्राम हेरोइन उसने इसी इलाके में कहीं छिपा दी। जिसका पता सुरक्षा एजेंसियां अब तक नहीं लगा पाई हैं।
मालूम हो कि पिछले दो सालो में इस रास्ते से करीब 20 बार घुसपैठ हो चुकी है। बीएसएफ की एक कंपनी के पास करीब 50 किलोमीटर तक सुरक्षा का जिम्मा है। जबकि जम्मू-कश्मीर और पंजाब बॉर्डर पर एक कंपनी के पास महज 5 से 7 किलोमीटर की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है। सरहदी थानों में पुलिस बल और साजो-सामान की कमी ने भी इस इलाके की सुरक्षा को ढीला बना दिया है। अगर इस इलाके में मुस्तैदी न बढ़ाई गई तो आतंकी चोर दरवाजे के सहारे देश में दाखिल होते रहेंगे।
देश की सबसे संवेदनशील मानी जाने वाली थार मरूस्थल बाड़मेर-जैसलमेर से सटी भारत-पाकिस्तान की पश्चिमी सरहद की सुरक्षा खतरे में हैं । यहां न केवल मादक पदार्थो के तस्कर, बल्कि देश के गद्दार बेखौफ होकर अपने नापाक इरादों में कामयाब हो रहे हैं। यहां से सामरिक महत्व की सूचनाएं पाक भेजने के आरोप में जैसलमेर और नाचना इलाके से आईएसआई के तीन एजेंटों के धरे जाने से खुफिया एजेंसियां सकते में हैं। आईबी, सीआईडी व अन्य एजेंसियां इन आरोपियों के जाल में सेंध लगाने के प्रयास में हैं।
वाया अटारी पाक पहुंच रही गुप्त सूचनाएं
पश्चिमी सरहद तारबंदी से पूर्व जासूसों व एजेंसियों के गुर्गो के लिए सैरगाह मानी जाती थी। तारबंदी के अभाव में जासूसों के साथ-साथ तस्कर धोरों में छुपकर सीमा पार आते व जाते थे। तारबंदी के बाद पिछले कई वर्षो से इस पर अंकुश लगा है, लेकिन अब जासूसों ने नया रास्ता अख्तियार कर लिया है। वे पश्चिमी सरहदों से सूचनाएं एकत्रित करने के बाद पंजाब में अटारी के रास्ते एजेंटों को सीमा पार सूचनाएं भिजवा रहे हैं।
भाई-भतीजे और रिश्तेदारों को गैंग में शामिल कर रहे हैं तस्कर
आईएसआई के अधिकारी व एजेंट पश्चिमी सीमा के करीब रहने वालों को मोटी रकम का लालच देकर गद्दारी को तैयार करते हैं। इसके बाद यह लोग अपने रिश्तेदारों को भी गद्दारी के इस खेल में शामिल कर जाल को फैलाने में लग जाते हैं। सीआईडी के हत्थे चढ़े जासूस गुलाम रसूल ने अपने भतीजे मजीद को साथ मिला लिया था यह उससे हुई पूछताछ में सामने आया था । जांच एजेंसियों को आशंका है कि उसके साथ बड़ी संख्या में क्षेत्र के युवा जासूसी में शामिल हो सकते हैं। इस सम्बन्ध में सीआईडी को कुछ संदिग्ध लोगों के नाम भी हाथ लगे हैं, जिनकी तस्दीक की जा रही है।
अवैध रूप से रह रहे हैं विदेशी
पिछले कई वर्षो से पाकिस्तान से आए कई लोग सीमावर्ती जिलों में अवैध रूप से रह रहें हैं। खुफिया एजेंसियां इन पर जासूस होने का संदेह भी जाहिर कर चुकी है। यही नहीं आंकड़े बताते हैं कि सीमावर्ती ईलाको में कई पाकिस्तान के लोग थार एक्सप्रेस से भारत आये और यहीं कहीं वीजा अवधि खत्म होने के बाद छुपे हुए हैं । पाकिस्तानी नागरिको के अलावा काफी बंगलादेशी भी यहाँ अवैध रूप से रहने की आशंका हैं ।
कब-कब कौन पकड़ा गया
दिनांक जासूस
27 मार्च 2000 मुनीर अहमद, रहीमयार खां, पाकिस्तान
27 मार्च 2000 भजनदास चौधरी, गिदरावली, सिरसा
27 मार्च 2001 पठाई खां, राठौड़ों का तला, बाड़मेर
नवम्बर 2001 रमजान, किशनगढ़, जैसलमेर
नवम्बर 2001 नूरे खां, जैसलमेर जिला
12 दिसम्बर 2001 असलम खां, पाकिस्तान
8 सितम्बर 2002 मोहम्मद अली उर्फ अबुल कासम, घाटेल, बांग्लादेश
8 सितम्बर 2002 चन्द्रेश शुक्ला, कटनी, मध्यप्रदेश। फौज का सिपाही व सहयोगी था
13 मार्च 2005 मौला बक्श उर्फ मोलिया, खुइयाला जैसलमेर
19 मार्च 2005 हाजी खां उर्फ हाजीड़ा, सदाराड जैसलमेर
14 दिसम्बर 2005 ऋषि महेन्द्र, हैदराबाद, पाकिस्तान
16 दिसम्बर 2005 परवेज अहमद उर्फ जाहिद अली हैदराबाद पाकिस्तान
13 अगस्त 2006 इनायत उल्ला, साकडिया नाचना जैसलमेर

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