Monday, 31 December 2012

सरहद के पार हैं हालात काफी नासाज़ , सरकार हैं चुप्पी साधे-- फ़ाइल फोटो  
हिन्दुओं की आस्था पर प्रहार मौन भारत की सरकार
क्या पाकिस्तान की सरकार कट्टरपंथियों से डरी हुई हैं ?
दुर्गसिंह राजपुरोहित
बाड़मेर
हिन्दुओं की बड़ी संख्या पाकिस्तान में भी हैं लेकिन इन हिन्दुओ की सुरक्षा की बात आने पर हिन्दुओ की पाकिस्तान में दुर्दशा सामने आ जाती हैं। शुरुआत से ही पाकिस्तान में हिन्दू परिवार और हिन्दू परिवारों की बेटियां मुस्लिम कट्टरपंथियों के निशाने पर रहे हैं। लेकिन अब पाकिस्तान में मंदिर भी बुरी हालत में हैं, पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदू आबादी मंदिरों पर हमलों से परेशान है। लेकिन पाकिस्तान की सरकार ने इस पर चुप्पी साधी हुई है। हाल ही में एक मंदिर गिराया गया और इस मन्दिर में बसे हिंदू परिवारों के घर भी गिर डाले गए। मज़े की बात हैं कि घर और मन्दिर तोड़े जाने के दौरान सरकारी मशीनरी भी इन्हें बचाने की बजाय गिराने में लिप्त थी। रविवार को थार एक्सप्रेस से जोधपुर आये एक परिवार के मुखिया ने नाम ना छपने की शर्त पर बताया कि पाकिस्तान में सरकार मंदिरों पर कोई खास ध्यान नहीं दे रही है। कई पुराने मंदिर या तो नष्ट कर दिए गए हैं, या फिर उनकी हालत बहुत बुरी है। यही हाल अन्य अल्पसंख्यकों का भी है। पिछले दिनों कराची में एक मंदिर और कुछ हिंदुओं के घर गिरा दिए गए। हिन्दू लोग आक्रोशित होकर जब पुलिस के पास पहुंचे तो उनके आक्रोश को देकते हुए पाकिस्तान में अधिकारियों का कहना है कि अदालत ने कुछ अवैध इमारतों को गिराने के आदेश दिए थे, लेकिन मंदिर गिराने की बात से उन्होंने इनकार किया है। ऐसे में सवाल यह उठता हैं कि जब गिराई जाने वाली इमारतों में ये मंदिर था ही नहीं फिर क्यों इसे निशाना बनाया गया। वहीं पाकिस्तान हिंदू परिषद के एक सदस्य ने सोसियल साईट पर संवाददाता को बताया की जमीन अधिग्रहण को ले कर लम्बे समय से एक बिल्डर और हिंदू निवासियों के बीच विवाद चल रहा था। उनका कहना है कि जमीन हिंदुओं की है और बिल्डर उस पर कब्जा करना चाहता है।
कट्टरपंथ और भेदभाव
पाकिस्तान में कई गुरूद्वारे भी हैं। इनमें से अधिकतर पंजाब में हैं। भारत से भी कई बार लोग गुरूद्वारे में माथा टेकने के लिए पाकिस्तान जाते हैं। लेकिन देश में हिंदू और सिख अल्पसंख्यक हैं। पाकिस्तान की 17.4 करोड़ की आबादी में से हिंदू केवल 2.3 फीसदी ही हैं। इनमें से अधिकतर सिंध के इलाके में रहते हैं। अल्पसंख्यकों के लिए काम करने वाली संस्थाओं का दावा है कि पाकिस्तान में यह मंदिर या चर्च गिराने का पहला मामला नहीं है। इस से पहले भी देश में व्यावसायिक कारणों से अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को गिराया जा चुका है।। जानकारों का मानना है कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव किया जाता है। मंदिरों पर हमले केवल कट्टरपंथी मुस्लिम ही नहीं करते बल्कि आम लोग भी करते हैं। पिछले कुछ सालों में ये हमले कई गुना बढ़ गए हैं।
पाकिस्तान में सब कुछ छोड़ भारत आने वाले तेजदान देथा ने भी यह बात स्वीकार की है। 
संवाददाता से बातचीत में उन्होंने कहा, "चरमपंथ हिंदुओं और मंदिरों पर हमले का मुख्य कारण रहा है।" उन्होंने बताया कि पाकिस्तान में हिंदू काफी डरे हुए हैं और उन्हें सरकार से किसी तरह की मदद नहीं मिल रही है, "ये लोग सोचते हैं कि हिंदुओं पर और मंदिरों पर हमला कर के इन्हें जन्नत नसीब होगी।" उनका कहना है, "कई बार इन हमलों के पीछे आर्थिक कारण भी होते हैं। लेकिन अधिकतर मंदिरों और गिरिजाघरों पर चरमपंथी ही हमला करते हैं।" थार एक्सप्रेस से पाकिस्तान जाकर वापस भारत लौटे किशोर शर्मा के मुताबिक पाकिस्तान में चरमपंथ बढ़ता जा रहा है और वक्त के साथ साथ चरमपंथी और ताकतवर होते जा रहे हैं और "सरकार अल्पसंख्यकों को और उनके धार्मिक स्थलों को बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठा रही है।"

सांस्कृतिक धरोहर नष्ट
सिंध के रहने वाले एक हिन्दू ने पंजाब केसरी से बातचीत करते हुए बताया कि पाकिस्तान में सबसे पहला मंदिर 90 के दशक में गिराया गया। उस वक्त पाकिस्तान के लोगों में अयोध्या बाबरी मस्जिद के मामले पर रोष था, "यह सब बाबरी मस्जिद को गिराने के बाद ही शुरू हुआ। उसके जवाब में लोगों ने ना केवल मंदिर, बल्कि चर्चों पर भी हमले करने शुरू कर दिए।"
बाड़मेर के निवासी अशरफ अली खिलजी भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं और इस मुद्दे पर अपनी रे रखते हुए वो बताते हैं कि लोग यह बात नहीं समझ पा रहे हैं कि इन हमलों के कारण वे उनके देश की सांस्कृतिक धरोहर भी नष्ट कर रहे हैं "
पहले भी ऐसे टूटे कई मंदिर
जानकारी के अनुसार कराची के मालीर इलाके में एक मंदिर हुआ करता था। आर्किटेक्चर के लिहाज से यह एक शानदार इमारत थी। मंदिर में हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियों पर बहुत ही बारीकी से काम किया गया था। जब मंदिर पर हमला हुआ तब लोगों ने ये मूर्तियां भी तबाह कर दी। ये केवल पूजा पाठ की जगह नहीं हैं, यह पाकिस्तान की सांस्कृतिक धरोहर थी ।"
बाड़मेर निवासी वरिष्ठ पत्रकार कन्हैयालाल डलोरा के अनुसार इस गम्भीर घटना के बावजूद भी कोई कदम ना उठाए जाने पर पाकिस्तान सरकार की आलोचना की जानी चाहिए। डलोरा के मुताबिक पाकिस्तान में अब भी सैकड़ों मंदिर और चर्च हैं जो खंडहरों में तब्दील होते जा रहे हैं। सरकार इन पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। जानकारों का मानना है कि या तो सरकार चरमपंथियों से डरी हुई है या अल्पसंख्यकों के लिए कुछ करना ही नहीं चाहती। इसका नतीजा यह है कि पिछले कुछ सालों में हिंदुओं ने पाकिस्तान छोड़ भारत आना शुरू कर दिया है।

लालच देकर लूटी जा रही गरीबो की सम्पति

ऐसे लूटी जाती हैं गरीबो की सम्पति.. फ़ाइल चित्र 
बाड़मेर में इन दिनों कुछ लोग आम जन को लूटने के लिए एक ऐसी फर्जी लोटरी सिस्टम के जरिये योजनाओं का संचालन कर रहे हैं जिसमे आमजनता को लोटरी टिकट्स की तरह रसीदे दी जा रही हैं और उसके बाद यह कह कर उनको लालच देकर पैसे ऐठे जा रहे हैं कि उनकी रसीद के आधार पर उनको कार,मोटर साईकल ,टीवी समेत कई गिफ्ट दिए जायेगे और पुलिस चुपचाप इसे देख रही मानो कुछ हिस्सा उनका भी तय हो।