मुंबई के आज़ाद मैदान में मीडिया की गाड़ियां जलाने , उनके साथ मार-पीट करने की घटना शर्मनाक हैं कुछ लोग भारत में उन्माद फैला कर दंगे करवाना चाहते हैं !यह घटना काले अध्याय के रूप में साबित होगी , शर्म करो, शर्म करो शर्म करो शर्म करो शर्म करो शर्म करो शर्म करो शर्म करो शर्म करो शर्म करो शर्म करो शर्म करो .......................
Saturday, 11 August 2012
Friday, 10 August 2012
40 हज़ार में माँ-बाप ने बच्चा बेचा
| राजस्थान मानव तस्करी के मामले दिनोदिन बढ़ रहे हैं 40 हज़ार में माँ-बाप ने बच्चा बेचा |
जिगर के एक टुकड़े के लिए एक माँ ने अपने आँचल के दूसरे जिगर को 40 हज़ार रुपए में बेच दिया.
राजस्थान में पुलिस ने एक महिला- संध्या और उसके पति अशोक सहित पाँच लोगों को आठ दिन का नवजात बच्चा बेच देने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है.
गिरफ़्तार किए गए लोगों में संध्या के आठ दिन के नवजात बच्चे को खरीदने वाले दम्पती विनोद और उनकी पत्नी शकुन्तला भी शामिल हैं. संध्या एक ऐसी अभागी माँ है जिसने अपने नवजात बेटे को सिर्फ इसलिए बेच दिया क्योंकि उनके पास अपने साढ़े तीन साल के बेटे रौनक के इलाज के लिए पैसे नहीं थे.
नवजात का मोल लगा तो बात चालीस हजार रुपए में पक्की हुई.
ये घटना राज्य के सरहदी जिले श्रीगंगानगर में तब सामने आई जब संध्या और उसके पति अशोक ने पुलिस में शिकायत की कि उन्हें वादे के मुताबिक पैसे नहीं मिले.
पुलिस के मुताबिक ये पूरा सौदा चालीस हजार में हुआ क्योंकि संध्या का दूसरा बेटा जन्म से ही बीमार है और उसके इलाज के लिए चालीस हजार रुपए का खर्च बताया गया था.
गोदनामे के बहाने
श्रीगंगानगर में पुलिस की मानव तस्करी विरोधी शाखा के प्रमुख श्रवण दास ने बताया कि पुलिस ने सौदे की पहली किश्त में भुगतान हुए बीस हजार रुपए में से चौदह हजार संध्या के परिवार से बरामद कर लिए जबकि छह हजार रुपए संध्या के प्रसव में इलाज पर खर्च हो गए.
पुलिस ने इस मामले में एक सब रजिस्ट्रार सहित 11 लोगों का नाम प्राथमिकी में दर्ज किया है क्योंकि ये सारी कार्यवाही गोदनामे के बहाने हुई और बाकायदा उसका पंजीयन भी हुआ.
श्रवण दास के अनुसार, "इसमें गवाह, वकील और इस दस्तावेज का पंजीयन करने वाले सरकारी अधिकारी से पूछताछ हो रही है. अगर आरोप साबित हुआ तो और भी गिरफ्तारियाँ की जा सकती हैं."
आँचल की छाँव
ये सब तब हुआ जब संध्या ने गत 31 जुलाई को एक बच्चे को श्रीगंगानगर शहर में जन्म दिया और तीन अगस्त को करार के मुताबिक, संध्या ने अपने आँखों के तारे को दूसरे दम्पती को दे दिया. फिर पुलिस हरकत में आई तो ये नन्हीं जान फिर से अपनी माँ के आँचल की छाँव में आ गई.
राजस्थान में सरकार ने बीते साल ही अपने चौदह हजार स्वाथ्य केंद्रों और अस्पतालों पर सभी के लिए मुफ्त दवा का उपलब्ध करने का काम शुरू किया है.
फिर आखिर कोई माँ सिर्फ दवा-इलाज के लिए अपने बेटे को क्यों बेच रही है? सामाजिक कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव कहती हैं, "मुफ्त दवा कार्यक्रम का हम स्वागत करते हैं मगर अब भी इलाज बहुत महंगा है. हम चाहते है सरकार एक विहंगम स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू करे क्योंकि विकलांग और अपाहिज बच्चों के लिए कुछ भी नहीं है."
वो नवजात इस दुनिया के लिए बहुत नया है और उसने माँ का आँचल बस छुआ ही है. मगर अभी उसके नन्हें पाँव जमीन पर दर्ज भी नहीं हुए हैं कि लगता है उसे आते ही ग़रीबी, माँ की लाचारी और बेदर्द दुनिया के दस्तूर से रूबरू करा दिया गया हो.
सरकारी इलाज
"मुफ्त दवा कार्यक्रम का हम स्वागत करते हैं मगर अब भी इलाज बहुत महंगा है. हम चाहते है सरकार एक विहंगम स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू करे क्योंकि विकलांग और अपाहिज बच्चों के लिए कुछ भी नहीं है"
कविता श्रीवास्तव, सामाजिक कार्यकर्ता
ख़बर थार की: घुसपैठ का नया अड्डा बाड़मेर
ख़बर थार की: घुसपैठ का नया अड्डा बाड़मेर: घुसपैठियों के लिए जन्नत का दरवाज़ा पश्चिमी सीमा पिछले बीस सालो में कई कुख्यात तस्कर-जासूस धरे बाड़मेर। भारत में घुसपैठ का नया अड्डा बाड़म...
ख़बर थार की: ख़बर थार की: बाड़मेर से होनी थी हेरोइन की डील
ख़बर थार की: ख़बर थार की: बाड़मेर से होनी थी हेरोइन की डील: ख़बर थार की: बाड़मेर से होनी थी हेरोइन की डील : बाड़मेर से होनी थी हेरोइन की डील बाड़मेर जैसलमेर स्थित एक होटल में छापा मारकर आठ किलो हेरोइ...
घुसपैठ का नया अड्डा बाड़मेर
घुसपैठियों के लिए जन्नत का दरवाज़ा पश्चिमी सीमा
पिछले बीस सालो में कई कुख्यात तस्कर-जासूस धरे
पिछले बीस सालो में कई कुख्यात तस्कर-जासूस धरे
बाड़मेर। भारत में घुसपैठ का नया अड्डा बाड़मेर बन गया हैं , जिस तरह से पुणे में बम धमाको से मुल्क हिला हैं वैसे ही बाड़मेर में घटनाए होनी शुरू हो जाए तो कोई अचरज नहीं करना चाहिए , सरकार ने बाड़मेर , जैसलमेर , बीकानेर और श्रीगंगानगर में सीमा चौकियां बंद करके देश की सुरक्षा और अस्मत को वैसे भी खतरें में डालने की शुरुवात कर दी हैं , देश की पश्चिमी सीमा से बढ़ती घुसपैठ ने सुरक्षा बलों को परेशान कर दिया है। सीमा पार से आतंकी और तस्कर दोनों ही आ रहे हैं। लाख कोशिशों के बावजूद सुरक्षाबल उन्हें नहीं रोक पा रहे हैं। देश की पश्चिमी सीमा पर कई किलोमीटर तक तारबंदी की गई है। हर वक्त यहां बीएसएफ के जवानों का पहरा होता है। इसके बावजूद तबाही के सामान आरडीएक्स, टाइमर, डेटोनेटर, सेफ्टी फ्यूज, बैटरी और गोला बारूद देश में आ रहा है। जो सन 2009 में यहाँ भारी मात्रा में पकड़ा गया था और इसके साथ पाकिस्तान के लिए काम करने वाले तस्कर और बब्बर खालसा के आतंकवादी का भी पकड़ा जाना इस बात की पुष्टि कर चुका हैं की बाड़मेर अतंका और तस्करों का नया गढ़ बनता जा रहा हैं । दरअसल सीमा पार से आतंकियों ने हिंदुस्तान में दाखिल होने के लिए एक चोर दरवाजा खोज लिया है। याद रहे बाड़मेर के एक गांव में सुरक्षा एजेंसियों को एक खेत से तबाही के सामान के साथ पकड़े गए सोढ़ा खान ने सनसनीखेज खुलासा किया था। सोढ़ा खान के मुताबिक उससे पहले आलिया नाम का शख्स सीमा पार से तबाही का इतना सामान भारत में ला चुका है। जो एक शहर को उडा़ने के लिए काफी है। सोढा खान के बाद उसी की निशानदेही पर पुलिस ने एक और तस्कर यारू खान जैसलमेर को पकड़ा था जिसने पकडे़ जाने के बाद खुलासा किया कि सीमा पार से भारत में 60 करोड़ की हेरोइन आ चुकी है। राजस्थान पुलिस के मुताबिक राजस्थान के रेतीले इलाके से तबाही का सामान देश के भीतर लाना कोई मुश्किल काम नहीं है। ये सामान तारबंदी के नीचे से आ रहा है। इस बात पर पुलिस और सीमा सुरक्षा बल के बीच ठन गई थी ।
बाड़मेर के निवासी और सीमा सुरक्षा बल में कमांडेट रह चुके एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि बाड़मेर से लेकर जैसलमेर तक रेतीली मिट्टी को हटाकर सीमा में दाखिल होना बहुत आसान है। आतंकी इसी रास्ते से बार-बार देश में दाखिल हो रहे हैं। इस मिट्टी को हटाने के लिए किसी फावड़े की जरूरत नहीं पड़ती, हाथ से ही मिट्टी हटाकर कोई भी इस पार आ सकता है। इसके अलावा जैसलमेर में अमूमन रेत के इतने ऊंचे टीले बन जाते हैं कि कोई भी उसके सहारे तारबंदी को पारकर इधर आ सकता है।याद रहे कुछ साल पहले बाड़मेर बॉर्डर के जरिए यारू खां नाम का तस्कर भारत में दाखिल हुआ था। उसके पास से 50 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई। लेकिन 10 किलोग्राम हेरोइन उसने इसी इलाके में कहीं छिपा दी। जिसका पता सुरक्षा एजेंसियां अब तक नहीं लगा पाई हैं।
मालूम हो कि पिछले दो सालो में इस रास्ते से करीब 20 बार घुसपैठ हो चुकी है। बीएसएफ की एक कंपनी के पास करीब 50 किलोमीटर तक सुरक्षा का जिम्मा है। जबकि जम्मू-कश्मीर और पंजाब बॉर्डर पर एक कंपनी के पास महज 5 से 7 किलोमीटर की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है। सरहदी थानों में पुलिस बल और साजो-सामान की कमी ने भी इस इलाके की सुरक्षा को ढीला बना दिया है। अगर इस इलाके में मुस्तैदी न बढ़ाई गई तो आतंकी चोर दरवाजे के सहारे देश में दाखिल होते रहेंगे।
देश की सबसे संवेदनशील मानी जाने वाली थार मरूस्थल बाड़मेर-जैसलमेर से सटी भारत-पाकिस्तान की पश्चिमी सरहद की सुरक्षा खतरे में हैं । यहां न केवल मादक पदार्थो के तस्कर, बल्कि देश के गद्दार बेखौफ होकर अपने नापाक इरादों में कामयाब हो रहे हैं। यहां से सामरिक महत्व की सूचनाएं पाक भेजने के आरोप में जैसलमेर और नाचना इलाके से आईएसआई के तीन एजेंटों के धरे जाने से खुफिया एजेंसियां सकते में हैं। आईबी, सीआईडी व अन्य एजेंसियां इन आरोपियों के जाल में सेंध लगाने के प्रयास में हैं।
वाया अटारी पाक पहुंच रही गुप्त सूचनाएं
पश्चिमी सरहद तारबंदी से पूर्व जासूसों व एजेंसियों के गुर्गो के लिए सैरगाह मानी जाती थी। तारबंदी के अभाव में जासूसों के साथ-साथ तस्कर धोरों में छुपकर सीमा पार आते व जाते थे। तारबंदी के बाद पिछले कई वर्षो से इस पर अंकुश लगा है, लेकिन अब जासूसों ने नया रास्ता अख्तियार कर लिया है। वे पश्चिमी सरहदों से सूचनाएं एकत्रित करने के बाद पंजाब में अटारी के रास्ते एजेंटों को सीमा पार सूचनाएं भिजवा रहे हैं।
भाई-भतीजे और रिश्तेदारों को गैंग में शामिल कर रहे हैं तस्कर
आईएसआई के अधिकारी व एजेंट पश्चिमी सीमा के करीब रहने वालों को मोटी रकम का लालच देकर गद्दारी को तैयार करते हैं। इसके बाद यह लोग अपने रिश्तेदारों को भी गद्दारी के इस खेल में शामिल कर जाल को फैलाने में लग जाते हैं। सीआईडी के हत्थे चढ़े जासूस गुलाम रसूल ने अपने भतीजे मजीद को साथ मिला लिया था यह उससे हुई पूछताछ में सामने आया था । जांच एजेंसियों को आशंका है कि उसके साथ बड़ी संख्या में क्षेत्र के युवा जासूसी में शामिल हो सकते हैं। इस सम्बन्ध में सीआईडी को कुछ संदिग्ध लोगों के नाम भी हाथ लगे हैं, जिनकी तस्दीक की जा रही है।
अवैध रूप से रह रहे हैं विदेशी
पिछले कई वर्षो से पाकिस्तान से आए कई लोग सीमावर्ती जिलों में अवैध रूप से रह रहें हैं। खुफिया एजेंसियां इन पर जासूस होने का संदेह भी जाहिर कर चुकी है। यही नहीं आंकड़े बताते हैं कि सीमावर्ती ईलाको में कई पाकिस्तान के लोग थार एक्सप्रेस से भारत आये और यहीं कहीं वीजा अवधि खत्म होने के बाद छुपे हुए हैं । पाकिस्तानी नागरिको के अलावा काफी बंगलादेशी भी यहाँ अवैध रूप से रहने की आशंका हैं ।
कब-कब कौन पकड़ा गया
दिनांक जासूस
27 मार्च 2000 मुनीर अहमद, रहीमयार खां, पाकिस्तान
27 मार्च 2000 भजनदास चौधरी, गिदरावली, सिरसा
27 मार्च 2001 पठाई खां, राठौड़ों का तला, बाड़मेर
नवम्बर 2001 रमजान, किशनगढ़, जैसलमेर
नवम्बर 2001 नूरे खां, जैसलमेर जिला
12 दिसम्बर 2001 असलम खां, पाकिस्तान
8 सितम्बर 2002 मोहम्मद अली उर्फ अबुल कासम, घाटेल, बांग्लादेश
8 सितम्बर 2002 चन्द्रेश शुक्ला, कटनी, मध्यप्रदेश। फौज का सिपाही व सहयोगी था
13 मार्च 2005 मौला बक्श उर्फ मोलिया, खुइयाला जैसलमेर
19 मार्च 2005 हाजी खां उर्फ हाजीड़ा, सदाराड जैसलमेर
14 दिसम्बर 2005 ऋषि महेन्द्र, हैदराबाद, पाकिस्तान
16 दिसम्बर 2005 परवेज अहमद उर्फ जाहिद अली हैदराबाद पाकिस्तान
13 अगस्त 2006 इनायत उल्ला, साकडिया नाचना जैसलमेर
बाड़मेर के निवासी और सीमा सुरक्षा बल में कमांडेट रह चुके एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि बाड़मेर से लेकर जैसलमेर तक रेतीली मिट्टी को हटाकर सीमा में दाखिल होना बहुत आसान है। आतंकी इसी रास्ते से बार-बार देश में दाखिल हो रहे हैं। इस मिट्टी को हटाने के लिए किसी फावड़े की जरूरत नहीं पड़ती, हाथ से ही मिट्टी हटाकर कोई भी इस पार आ सकता है। इसके अलावा जैसलमेर में अमूमन रेत के इतने ऊंचे टीले बन जाते हैं कि कोई भी उसके सहारे तारबंदी को पारकर इधर आ सकता है।याद रहे कुछ साल पहले बाड़मेर बॉर्डर के जरिए यारू खां नाम का तस्कर भारत में दाखिल हुआ था। उसके पास से 50 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई। लेकिन 10 किलोग्राम हेरोइन उसने इसी इलाके में कहीं छिपा दी। जिसका पता सुरक्षा एजेंसियां अब तक नहीं लगा पाई हैं।
मालूम हो कि पिछले दो सालो में इस रास्ते से करीब 20 बार घुसपैठ हो चुकी है। बीएसएफ की एक कंपनी के पास करीब 50 किलोमीटर तक सुरक्षा का जिम्मा है। जबकि जम्मू-कश्मीर और पंजाब बॉर्डर पर एक कंपनी के पास महज 5 से 7 किलोमीटर की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है। सरहदी थानों में पुलिस बल और साजो-सामान की कमी ने भी इस इलाके की सुरक्षा को ढीला बना दिया है। अगर इस इलाके में मुस्तैदी न बढ़ाई गई तो आतंकी चोर दरवाजे के सहारे देश में दाखिल होते रहेंगे।
देश की सबसे संवेदनशील मानी जाने वाली थार मरूस्थल बाड़मेर-जैसलमेर से सटी भारत-पाकिस्तान की पश्चिमी सरहद की सुरक्षा खतरे में हैं । यहां न केवल मादक पदार्थो के तस्कर, बल्कि देश के गद्दार बेखौफ होकर अपने नापाक इरादों में कामयाब हो रहे हैं। यहां से सामरिक महत्व की सूचनाएं पाक भेजने के आरोप में जैसलमेर और नाचना इलाके से आईएसआई के तीन एजेंटों के धरे जाने से खुफिया एजेंसियां सकते में हैं। आईबी, सीआईडी व अन्य एजेंसियां इन आरोपियों के जाल में सेंध लगाने के प्रयास में हैं।
वाया अटारी पाक पहुंच रही गुप्त सूचनाएं
पश्चिमी सरहद तारबंदी से पूर्व जासूसों व एजेंसियों के गुर्गो के लिए सैरगाह मानी जाती थी। तारबंदी के अभाव में जासूसों के साथ-साथ तस्कर धोरों में छुपकर सीमा पार आते व जाते थे। तारबंदी के बाद पिछले कई वर्षो से इस पर अंकुश लगा है, लेकिन अब जासूसों ने नया रास्ता अख्तियार कर लिया है। वे पश्चिमी सरहदों से सूचनाएं एकत्रित करने के बाद पंजाब में अटारी के रास्ते एजेंटों को सीमा पार सूचनाएं भिजवा रहे हैं।
भाई-भतीजे और रिश्तेदारों को गैंग में शामिल कर रहे हैं तस्कर
आईएसआई के अधिकारी व एजेंट पश्चिमी सीमा के करीब रहने वालों को मोटी रकम का लालच देकर गद्दारी को तैयार करते हैं। इसके बाद यह लोग अपने रिश्तेदारों को भी गद्दारी के इस खेल में शामिल कर जाल को फैलाने में लग जाते हैं। सीआईडी के हत्थे चढ़े जासूस गुलाम रसूल ने अपने भतीजे मजीद को साथ मिला लिया था यह उससे हुई पूछताछ में सामने आया था । जांच एजेंसियों को आशंका है कि उसके साथ बड़ी संख्या में क्षेत्र के युवा जासूसी में शामिल हो सकते हैं। इस सम्बन्ध में सीआईडी को कुछ संदिग्ध लोगों के नाम भी हाथ लगे हैं, जिनकी तस्दीक की जा रही है।
अवैध रूप से रह रहे हैं विदेशी
पिछले कई वर्षो से पाकिस्तान से आए कई लोग सीमावर्ती जिलों में अवैध रूप से रह रहें हैं। खुफिया एजेंसियां इन पर जासूस होने का संदेह भी जाहिर कर चुकी है। यही नहीं आंकड़े बताते हैं कि सीमावर्ती ईलाको में कई पाकिस्तान के लोग थार एक्सप्रेस से भारत आये और यहीं कहीं वीजा अवधि खत्म होने के बाद छुपे हुए हैं । पाकिस्तानी नागरिको के अलावा काफी बंगलादेशी भी यहाँ अवैध रूप से रहने की आशंका हैं ।
कब-कब कौन पकड़ा गया
दिनांक जासूस
27 मार्च 2000 मुनीर अहमद, रहीमयार खां, पाकिस्तान
27 मार्च 2000 भजनदास चौधरी, गिदरावली, सिरसा
27 मार्च 2001 पठाई खां, राठौड़ों का तला, बाड़मेर
नवम्बर 2001 रमजान, किशनगढ़, जैसलमेर
नवम्बर 2001 नूरे खां, जैसलमेर जिला
12 दिसम्बर 2001 असलम खां, पाकिस्तान
8 सितम्बर 2002 मोहम्मद अली उर्फ अबुल कासम, घाटेल, बांग्लादेश
8 सितम्बर 2002 चन्द्रेश शुक्ला, कटनी, मध्यप्रदेश। फौज का सिपाही व सहयोगी था
13 मार्च 2005 मौला बक्श उर्फ मोलिया, खुइयाला जैसलमेर
19 मार्च 2005 हाजी खां उर्फ हाजीड़ा, सदाराड जैसलमेर
14 दिसम्बर 2005 ऋषि महेन्द्र, हैदराबाद, पाकिस्तान
16 दिसम्बर 2005 परवेज अहमद उर्फ जाहिद अली हैदराबाद पाकिस्तान
13 अगस्त 2006 इनायत उल्ला, साकडिया नाचना जैसलमेर
ख़बर थार की: बाड़मेर से होनी थी हेरोइन की डील
ख़बर थार की: बाड़मेर से होनी थी हेरोइन की डील: बाड़मेर से होनी थी हेरोइन की डील बाड़मेर जैसलमेर स्थित एक होटल में छापा मारकर आठ किलो हेरोइन के साथ चार जनों को गिरफ्तार किया गया लेकिनसूत्...
बाड़मेर से होनी थी हेरोइन की डील
बाड़मेर से होनी थी हेरोइन की डीलबाड़मेर
जैसलमेर स्थित एक होटल में छापा मारकर आठ किलो हेरोइन के साथ चार जनों को गिरफ्तार किया गया लेकिनसूत्रों के अनुसार इनकी योजना बाड़मेर में ये सारी डील करने की थी , बुधवार को एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉयड (एटीएस) ने जैसलमेर स्थित एक होटल में छापा मारकर आठ किलो हेरोइन के साथ चार जनों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से 4.35 लाख रूपए, एक कार व जीप भी बरामद किए गए हैं। आरोपियों में से तीन व्यक्ति पंजाब और एक जैसलमेर का है। पूरी आशंका है कि जब्त हेरोइन सीमा पार से आई और इसकी आपूर्ति पंजाब में की जानी थी।
एडीजी (एटीएस) आलोक त्रिपाठी के अनुसार एटीएस को सीमा पार से मादक पदार्थो की खेप जैसलमेर आने की सूचना मिली। जिसकी डिलीवरी लेने के लिए पंजाब के तरनतारन से तीन व्यक्ति कार में सवार होकर सुबह जैसलमेर पहुंचे और एक होटल में ठहरे।
संदेह होने पर एटीएस ने उसका पीछा किया और मौका देखकर होटल के कमरे में छापा मारा। वहां से पंजाब के तरनतारन निवासी कमरपाल सिंह (35), गुरदीप सिंह (69) व परमजीत सिंह (46) तथा जैसलमेर के करमावली निवासी जाम खान (30) पुत्र अतार खान को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से आठ किलो हेरोइन, 4.35 लाख रूपए भी बरामद किए गए। एटीएस का दावा है कि अति उच्च क्वालिटी वाली यह हेरोइन सीमा पार से आई है। इस मामले में दो-तीन अन्य व्यक्ति भी शामिल हो सकते हैं। जिनकी तलाश जारी है। इस सम्बन्ध में जैसलमेर कोतवाली थाने में मामला दर्ज किया गया है।
सूत्रों के अनुसार पंजाब के दोनों व्यक्तियों को हेरोइन की डिलीवरी बाड़मेर जिले में किसी स्थान पर होनी थी। जिसकी जानकारी एटीएस को मिल गई, लेकिन इसका पता तस्करों को लग गया और उन्होंने बाड़मेर के स्थान पर जैसलमेर में डील का निर्णय किया। आठ किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किए चारों आरोपियो से गुरूवार को विभिन्न एजेंसियां पूछताछ मे जुटी रही। एंटी टेरेरिस्ट स्कवायर्ड व पुलिस के अलावा सीमा सुरक्षा बल, इंटेलिजेंस ब्यूरो व सतर्कता एजेंसियो ने गिरफ्तार चारो आरोपियो से संयुक्त पूछताछ जारी रखी और महत्वपूर्ण जानकारियां खंगालने का प्रयास किया। एटीएस सूत्रो के अनुसार हेरोइन जैसलमेर में पाकिस्तान से आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह आशंका जताई जा रही है कि सीमा पार से जैसलमेर लाई गई इस हेरोइन की आपूर्ति पंजाब मे की जानी थी , और यह तय था की डील बाड़मेर में कहीं होनी थी । इससे पूर्व पंजाब के दोनो व्यक्तियो को हेरोइन की डिलीवरी बाड़मेर जिले मे किसी स्थान पर होनी थी, जिसकी जानकारी एटीएस को मिल गई थी, लेकिन इसका पता तस्करो को लग गया और उन्होने बाड़मेर की जगह जैसलमेर मे डील करने का निर्णय किया। जैसलमेर में होने वाली इस 'डील' की भनक भी एटीएस को लग गई थी।
बाड़मेर से पूर्व में आई थी 60 किलो हेरोइन
याद रहे वर्ष सितम्बर 2009 में बाड़मेर सीमा से होकर साथ किलो हेरोइन आने की बात तस्कर सोढा खान ने पूछताछ के दौरान आनी बताई थी , और यारु खान के पास पचास किलो हेरोइन पकड़ी भी गई थी हालांकि दस किलो हेरोइन का अब तक कोई पता नहीं चला ।
पांच बार खेप आई गोला-बारूद और हेरोइन की
कुख्यात तस्कर सोढा खान के अनुसार बाड़मेर में पक़डी गई खेप तो पांचवीं थी। पुलिस के हत्थे चढ़े गोला-बारूद के तस्कर और बब्बर खासला के दो आतंकियों से अब तक की पूछताछ ने राजस्थान पुलिस के हाथ-पांव फुला दिएथे । पश्चिमी सीमा पर ब़ाडमेर के पास बरामद गोला-बारूद का जखीरा तो पांचवीं खेप थी। इससे पहले चार खेप वे आतंकियों तक पहुंचा चुके थे । पांचवीं खेप की डिलीवरी के वक्त पुलिस के हत्थे चढ़े तस्कर सोढ़ा खान और इससे जु़डे दूसरे तस्करों से पूछताछ में यह खुलासा हुआ था । सोढा खान से पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि सबसे पहले मार्च 2009 में उसने माल की डिलीवरी रामदा को की थी। गुजरात का तस्कर रामदा फिलहाल गुजरात की ही जेल में बंद है। यह माल पाकिस्तान के आलिया के आदेश पर फोटिया लेकर आया था। दूसरी बार आलिया ने फिर सामान भिजवाया।
आलिया की कॉल पर सोढा ने माल की डिलीवरी मुबारक को की थी, तीसरी बार डिलीवरी लेने शेरू आया था, चौथी बार फिर सोढ़ा ने मुबारक को माल डिलीवर किया था। अब करीब साढ़े तीन साल इस मामले के बीतने के बाद भी पुलिस की नई मुसीबत अब जखीरे की वे चार खेप हैं, जो उसकी पहुंच से बाहर है। पुलिस अब भी बब्बर खालसा के आंतकी हरजोत की तलाश कर रही है। पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली कि पिछली चार खेप की डिलीवरी मुबारक और शेरू ने हरजोत को की थी, लेकिन तबाही के सामान और आतंक के नेटवर्क के खुलासे में पुलिस की ब़डी अ़डचन है कोड नेम।
आईएसआई ने अपने गुर्गो की पहचान छुपाने के लिए कोड नाम दे रखा है। सोढा खान ने पूछताछ में बताया कि यदि उसके और दूसरे तस्कर खानिया में समझौता नहीं होता, तो शायद गोला-बारूद की पांचवीं खेप पुलिस को नहीं मिल पाती। इस पूछताछ में एक और खुलासा हुआ है। अब भारत में गोला-बारूद की डिलीवरी के लिए पाकिस्तान में बैठे उनके आकाओं ने रूट बदल दिया है। पहले वे डिलीवरी जम्मू-कश्मीर और पंजाब बॉर्डर से होती थी, लेकिन वहां सख्ती बढ़ने पर अब ब़ाडमेर-जैसलमेर से माल परमजीत सिंह उर्फ पम्मा की मॉनीटरिंग में हो रहा था। बाबर खालसा का आतंकी परमजीत सिंह उर्फ पम्मा अब लन्दन में बैठा हुआ हैं ।
जैसलमेर स्थित एक होटल में छापा मारकर आठ किलो हेरोइन के साथ चार जनों को गिरफ्तार किया गया लेकिनसूत्रों के अनुसार इनकी योजना बाड़मेर में ये सारी डील करने की थी , बुधवार को एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉयड (एटीएस) ने जैसलमेर स्थित एक होटल में छापा मारकर आठ किलो हेरोइन के साथ चार जनों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से 4.35 लाख रूपए, एक कार व जीप भी बरामद किए गए हैं। आरोपियों में से तीन व्यक्ति पंजाब और एक जैसलमेर का है। पूरी आशंका है कि जब्त हेरोइन सीमा पार से आई और इसकी आपूर्ति पंजाब में की जानी थी।
एडीजी (एटीएस) आलोक त्रिपाठी के अनुसार एटीएस को सीमा पार से मादक पदार्थो की खेप जैसलमेर आने की सूचना मिली। जिसकी डिलीवरी लेने के लिए पंजाब के तरनतारन से तीन व्यक्ति कार में सवार होकर सुबह जैसलमेर पहुंचे और एक होटल में ठहरे।
संदेह होने पर एटीएस ने उसका पीछा किया और मौका देखकर होटल के कमरे में छापा मारा। वहां से पंजाब के तरनतारन निवासी कमरपाल सिंह (35), गुरदीप सिंह (69) व परमजीत सिंह (46) तथा जैसलमेर के करमावली निवासी जाम खान (30) पुत्र अतार खान को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से आठ किलो हेरोइन, 4.35 लाख रूपए भी बरामद किए गए। एटीएस का दावा है कि अति उच्च क्वालिटी वाली यह हेरोइन सीमा पार से आई है। इस मामले में दो-तीन अन्य व्यक्ति भी शामिल हो सकते हैं। जिनकी तलाश जारी है। इस सम्बन्ध में जैसलमेर कोतवाली थाने में मामला दर्ज किया गया है।
सूत्रों के अनुसार पंजाब के दोनों व्यक्तियों को हेरोइन की डिलीवरी बाड़मेर जिले में किसी स्थान पर होनी थी। जिसकी जानकारी एटीएस को मिल गई, लेकिन इसका पता तस्करों को लग गया और उन्होंने बाड़मेर के स्थान पर जैसलमेर में डील का निर्णय किया। आठ किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किए चारों आरोपियो से गुरूवार को विभिन्न एजेंसियां पूछताछ मे जुटी रही। एंटी टेरेरिस्ट स्कवायर्ड व पुलिस के अलावा सीमा सुरक्षा बल, इंटेलिजेंस ब्यूरो व सतर्कता एजेंसियो ने गिरफ्तार चारो आरोपियो से संयुक्त पूछताछ जारी रखी और महत्वपूर्ण जानकारियां खंगालने का प्रयास किया। एटीएस सूत्रो के अनुसार हेरोइन जैसलमेर में पाकिस्तान से आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह आशंका जताई जा रही है कि सीमा पार से जैसलमेर लाई गई इस हेरोइन की आपूर्ति पंजाब मे की जानी थी , और यह तय था की डील बाड़मेर में कहीं होनी थी । इससे पूर्व पंजाब के दोनो व्यक्तियो को हेरोइन की डिलीवरी बाड़मेर जिले मे किसी स्थान पर होनी थी, जिसकी जानकारी एटीएस को मिल गई थी, लेकिन इसका पता तस्करो को लग गया और उन्होने बाड़मेर की जगह जैसलमेर मे डील करने का निर्णय किया। जैसलमेर में होने वाली इस 'डील' की भनक भी एटीएस को लग गई थी।
बाड़मेर से पूर्व में आई थी 60 किलो हेरोइन
याद रहे वर्ष सितम्बर 2009 में बाड़मेर सीमा से होकर साथ किलो हेरोइन आने की बात तस्कर सोढा खान ने पूछताछ के दौरान आनी बताई थी , और यारु खान के पास पचास किलो हेरोइन पकड़ी भी गई थी हालांकि दस किलो हेरोइन का अब तक कोई पता नहीं चला ।
पांच बार खेप आई गोला-बारूद और हेरोइन की
कुख्यात तस्कर सोढा खान के अनुसार बाड़मेर में पक़डी गई खेप तो पांचवीं थी। पुलिस के हत्थे चढ़े गोला-बारूद के तस्कर और बब्बर खासला के दो आतंकियों से अब तक की पूछताछ ने राजस्थान पुलिस के हाथ-पांव फुला दिएथे । पश्चिमी सीमा पर ब़ाडमेर के पास बरामद गोला-बारूद का जखीरा तो पांचवीं खेप थी। इससे पहले चार खेप वे आतंकियों तक पहुंचा चुके थे । पांचवीं खेप की डिलीवरी के वक्त पुलिस के हत्थे चढ़े तस्कर सोढ़ा खान और इससे जु़डे दूसरे तस्करों से पूछताछ में यह खुलासा हुआ था । सोढा खान से पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि सबसे पहले मार्च 2009 में उसने माल की डिलीवरी रामदा को की थी। गुजरात का तस्कर रामदा फिलहाल गुजरात की ही जेल में बंद है। यह माल पाकिस्तान के आलिया के आदेश पर फोटिया लेकर आया था। दूसरी बार आलिया ने फिर सामान भिजवाया।
आलिया की कॉल पर सोढा ने माल की डिलीवरी मुबारक को की थी, तीसरी बार डिलीवरी लेने शेरू आया था, चौथी बार फिर सोढ़ा ने मुबारक को माल डिलीवर किया था। अब करीब साढ़े तीन साल इस मामले के बीतने के बाद भी पुलिस की नई मुसीबत अब जखीरे की वे चार खेप हैं, जो उसकी पहुंच से बाहर है। पुलिस अब भी बब्बर खालसा के आंतकी हरजोत की तलाश कर रही है। पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली कि पिछली चार खेप की डिलीवरी मुबारक और शेरू ने हरजोत को की थी, लेकिन तबाही के सामान और आतंक के नेटवर्क के खुलासे में पुलिस की ब़डी अ़डचन है कोड नेम।
आईएसआई ने अपने गुर्गो की पहचान छुपाने के लिए कोड नाम दे रखा है। सोढा खान ने पूछताछ में बताया कि यदि उसके और दूसरे तस्कर खानिया में समझौता नहीं होता, तो शायद गोला-बारूद की पांचवीं खेप पुलिस को नहीं मिल पाती। इस पूछताछ में एक और खुलासा हुआ है। अब भारत में गोला-बारूद की डिलीवरी के लिए पाकिस्तान में बैठे उनके आकाओं ने रूट बदल दिया है। पहले वे डिलीवरी जम्मू-कश्मीर और पंजाब बॉर्डर से होती थी, लेकिन वहां सख्ती बढ़ने पर अब ब़ाडमेर-जैसलमेर से माल परमजीत सिंह उर्फ पम्मा की मॉनीटरिंग में हो रहा था। बाबर खालसा का आतंकी परमजीत सिंह उर्फ पम्मा अब लन्दन में बैठा हुआ हैं ।
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