Friday, 10 May 2013

जांच अधिकारी डॉ बीएस गहलोत पर भ्रष्टाचार का सीधा आरोप


चिकित्सक और जांच अधिकारी की मिलीभगत से
जांच अधिकारी डॉ बीएस गहलोत पर भ्रष्टाचार का सीधा आरोप 
कलेक्टर की जांच दरकिनार 
बाड़मेर।
एक चिकित्सक को उसके जाति के चिकित्सक ने जांच में दोषी होने के बाद भी निर्दोष घोषित कर दिया। यह मामला बाड़मेर का हैं। बाड़मेर के लंगेरा गाँव के निवासी दुर्गसिंह राजपुरोहित ने अगस्त माह में अपने स्तर पर मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना की बजाय ब्रांडेड दवाएं लिखने वाले एक चिकित्सक की करीब आठ सौ से ज्यादा पर्चियां एकत्रित करके डॉ समित शर्मा , प्रबंध निदेशक राजस्थान मेडिकल कॉरप्रेशन को शिकायती पत्र दिया गया था जिसमे कई अस्पताल में आने वाले मरीजो की पर्चियां भी संलग्न की थी। उन पर्चियों की जांच के बाद तत्कालीन बाड़मेर जिला कलक्टर डॉ वीणा प्रधान ने चिकित्सक लंगेरा रोड स्थित पीरचंद हंजारीमल डिस्पेंसरी के डॉ सुरेश माली को कारण बताओ नोटिस भी दिया था जिसमे उन्होंने स्पष्ट लिखा था कि जांच के दौरान अस्पताल की उनके द्वारा लिखी गई पर्चियों पर एक कम्पनी विशेष की दवाइयां लिखी गिया थी। तत्कालीन जिला कलेक्टर के द्वारा नोटिस देने की कार्यवाही के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से अतिआवश्यक पत्र लिख कर इस मामले की जांच के आदेश बाड़मेर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दिए गये थे। बाड़मेर के सीएमएचओ ने इस मामले की जांच के आदेश डॉ बीएस गहलोत को दिए थे, जो वर्तमान में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना प्रभारी हैं। डॉ गहलोत ने परिवादी दुर्गसिंह के बयान लेकर खानापूर्ति करते हुए अंतिम रिपोर्ट में यह लिखा कि सबूतों के आभाव में मामला सत्य प्रतीत नहीं होता। इसमें पूरी जालसाजी का आरोप परिवादी ने जांच अधिकारी पर लगाते हुए जांच अधिकारी को कटघरे में खड़ा किया हैं और मुख्यमंत्री समेत स्वास्थ्य विभाग निदेशालय को वापस पत्र लिख कर इस मामले की जांच ईमानदार अधिकारी से करवाने की मांग की हैं। साथ ही आरोपी चिकित्सक के अलावा जांच अधिकारी डॉ बीएस गहलोत पर इस मामले की जांच के दौरान आर्थिक लाभ लेकर डॉक्टर को बचाने का आरोप लगाते हुए जांच अधिकारी के खिलाफ भी जांच की मांग मुख्यमंत्री से की गई और बाड़मेर के सीएमएचओ को ज्ञापन देकर जांच करवाने की भी मांग की गई। परिवादी दुर्गसिंह की मांग पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस भ्रष्टाचार को गम्भीरता से लेते हुए वापस इस मामले के जांच के आदेश दे दिए हैं। अब इस मामले की जांच बाड़मेर के आरसीएचओ को दी गई हैं जिसमे वे जांच अधिकारी की इस मामले में फर्जी फाइनल रिपोर्ट के आरोपों की जांच करेंगे। वहीँ इस मामले में परिवादी द्वारा पूर्व में पर्चियां देकर मामले कोई जांच की अपील करने पर ही बाड़मेर की तत्कालीन जिला कलेक्टर डॉ वीणा प्रधान ने आरोपी चिकित्सक पर लगाए गये आरोपों की जांच करवाकर इस शिकायत को सही पाया था और नोटिस जारी किया था लेकिन उस नोटिस को जांच अधिकारी ने दरकिनार कर दिया और जिला कलेक्टर की जांच पर भी सवाल खड़े कर दिए। अब मामले की जांच वापस शुरू से की जायेगी और जांच अधिकारी को भी मामले में लीपापोती के लिए जांच से गुजरना पड़ेगा।  

Wednesday, 13 March 2013

ख़बर थार की: श्वानो और कौवों के लिए हर रोज बनती हैं मिठाइयाँ

ख़बर थार की: श्वानो और कौवों के लिए हर रोज बनती हैं मिठाइयाँ: श्वानो और कौवों के लिए हर रोज बनती हैं मिठाइयाँ  दुर्गसिंह राजपुरोहित  बाड़मेर।  बाड़मेर शहर के सार्वजनिक श्मशान घाट में इन दिनों एक ...

श्वानो और कौवों के लिए हर रोज बनती हैं मिठाइयाँ

श्वानो और कौवों के लिए हर रोज बनती हैं मिठाइयाँ 
दुर्गसिंह राजपुरोहित 
बाड़मेर। 
बाड़मेर शहर के सार्वजनिक श्मशान घाट में इन दिनों एक गजब का जीव प्रेम सभी के आकर्षण का केंद्र बना हुआ हैं। सार्वजनिक श्मशान घाट में पिछले ढाई सालो से आवारा श्वानो और कौवों के लिए भोजन बनाया जा रहा हैं जो सभी के आकर्षण इसलिए कर देता हैं कि हरी ॐ को आवाज के साथ सारे कौवे यहाँ पर भोजन पाने के लिए इकट्ठा हो जाते हैं। दरअसल श्वान और कौवे भारत में सबसे ज्यादा हीन दृष्टि से देखे जाने वाले जीवो में शामिल हैं। इनको श्राद्ध पक्ष में ही लोग श्रद्धा के साथ भोजन देते हैं ताकि पितरो तक भोजन का पुण्य पहुंचे लेकिन आम दिनों में इनकी आवाज से ही सभी को नफरत का अहसास हो जाता हैं। लेकिन सारी सोच और किस्से कहानियां यहाँ के नज़ारे देख कर बदल जाते हैं। लोग सुबह से लगाकर शाम तक इनकी देखभाल करते हैं मानो ये उनके पालतू पक्षी से भी प्यारे हो। कई धर्म प्रेमी और सेवाभाव रखने वाले लोग यहाँ इन कौवों के लिए प्रतिदिन भोजन बनाने से लगाकर उनको खिलाने के लिए यहाँ पहुँचते हैं। इनके लिए कभी खीर पुडी कभी बिस्किट तो कभी बूंदी की मिठाई इनके लिए बनाई जाती हैं। यही नही लोगो ने तो इनके लिए सारे बर्तन, भोजन बनाने के लिए घी तेल आटा और दुसरे सामान को भी यहीं पर इकट्ठा कर रखा हैं। लोगो की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके इस सामूहिक काक भोज के लिए लोग आते हैं और अपने सामर्थ्य अनुसार योगदान देते हैं। इस पूरे कार्य में सबसे ज्यादा दिलचस्प बात यह हैं कि कौवे सिर्फ इन लोगो के द्वारा हरी ॐ के उच्चारण के बाद ही यहाँ आते हैं जो शायद इनके प्रतिदिन के अभ्यास के कारण ही हो सका हैं। हरी ॐ के एक बार के उच्चारण से यहाँ सैकड़ों की संख्या में कौवों की फौज भोजन पाने के लिए उमड़ पड़ती हैं। यहाँ पर हर रोज आकर अपना सहयोग देने वाले बताते हैं कि समाज से बहिष्कृत जीवो में कौवे शामिल हैं और शहर में इनके भोजन की समस्या कायम रहती हैं इसलिए वे इनको हमेशा दो समय का भोजन देने की मुहीम से जुड़े हैं।
बाड़मेर के सार्वजनिक श्मशान घाट में प्रतिदिन सुबह और शाम के समय इनके लिए भोजन तैयार होता हैं। कई लोग इनके लिए भोजन तैयार करने के समय यहाँ आते हैं। ऐसा भी नहीं हैं कि ये लोग घर पर बेकार बैठे होने के की वजह से यहाँ पहुँचते हैं बल्कि कई सरकारी नौकरी करने वाले लोग भी यहाँ आते हैं और अपनी सेवा देते हैं। उच्च माध्यमिक विधालय स्टेशन रोड के विज्ञानं प्रयोगशाला शिक्षक प्रतिदिन यहाँ आकर अपने हाथो से श्वानो और कौवों के लिए भोजन बनाते हैं और उन्हें खिलाते हैं। उनके अनुसार इस कार्य में उन्हें आत्मिक शांति की प्राप्ति होती हैं।
पूरे भारत में सार्वजनिक श्मशान घाट के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने वाले बाड़मेर के सार्वजनिक श्मशान घाट में लोगो को इस नेक काम की प्रेरणा पार्षद भवानी सिंह शेखावत से मिल रही हैं। दानदाताओं से लगाकर जीव प्रेमियों तक सभी को वे इन जीवों के लिए काम करने को प्रेरित कर रहे हैं। अब तक दानदाताओं और स्थानीय निकाय की मदद से सार्वजनिक श्मशान घाट में करोड़ो रूपए खर्च कर इसके सौन्दर्य को बढ़ाया गया हैं और इसमें गोशाला, कबूतरों के लिए भोजन की व्यवस्था , कुत्तो के लिए भोजन शाला , और तो और कौवों के लिए भी भोजन की व्यवस्था सब यही पर किया जा रहा हैं। इन प्रयासों को काफी सार्थक रूप से आमजनता का सहयोग भी मिल रहा हैं। क्यूंकि अब तक पूरे विश्व में कही पर भी शमशान घाट में इस तरह के काम शायद की किये जा रहे हैं।