Wednesday, 13 March 2013
ख़बर थार की: श्वानो और कौवों के लिए हर रोज बनती हैं मिठाइयाँ
ख़बर थार की: श्वानो और कौवों के लिए हर रोज बनती हैं मिठाइयाँ: श्वानो और कौवों के लिए हर रोज बनती हैं मिठाइयाँ दुर्गसिंह राजपुरोहित बाड़मेर। बाड़मेर शहर के सार्वजनिक श्मशान घाट में इन दिनों एक ...
श्वानो और कौवों के लिए हर रोज बनती हैं मिठाइयाँ
श्वानो और कौवों के लिए हर रोज बनती हैं मिठाइयाँ
दुर्गसिंह राजपुरोहित
बाड़मेर।
बाड़मेर शहर के सार्वजनिक श्मशान घाट में इन दिनों एक गजब का जीव प्रेम सभी के आकर्षण का केंद्र बना हुआ हैं। सार्वजनिक श्मशान घाट में पिछले ढाई सालो से आवारा श्वानो और कौवों के लिए भोजन बनाया जा रहा हैं जो सभी के आकर्षण इसलिए कर देता हैं कि हरी ॐ को आवाज के साथ सारे कौवे यहाँ पर भोजन पाने के लिए इकट्ठा हो जाते हैं। दरअसल श्वान और कौवे भारत में सबसे ज्यादा हीन दृष्टि से देखे जाने वाले जीवो में शामिल हैं। इनको श्राद्ध पक्ष में ही लोग श्रद्धा के साथ भोजन देते हैं ताकि पितरो तक भोजन का पुण्य पहुंचे लेकिन आम दिनों में इनकी आवाज से ही सभी को नफरत का अहसास हो जाता हैं। लेकिन सारी सोच और किस्से कहानियां यहाँ के नज़ारे देख कर बदल जाते हैं। लोग सुबह से लगाकर शाम तक इनकी देखभाल करते हैं मानो ये उनके पालतू पक्षी से भी प्यारे हो। कई धर्म प्रेमी और सेवाभाव रखने वाले लोग यहाँ इन कौवों के लिए प्रतिदिन भोजन बनाने से लगाकर उनको खिलाने के लिए यहाँ पहुँचते हैं। इनके लिए कभी खीर पुडी कभी बिस्किट तो कभी बूंदी की मिठाई इनके लिए बनाई जाती हैं। यही नही लोगो ने तो इनके लिए सारे बर्तन, भोजन बनाने के लिए घी तेल आटा और दुसरे सामान को भी यहीं पर इकट्ठा कर रखा हैं। लोगो की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके इस सामूहिक काक भोज के लिए लोग आते हैं और अपने सामर्थ्य अनुसार योगदान देते हैं। इस पूरे कार्य में सबसे ज्यादा दिलचस्प बात यह हैं कि कौवे सिर्फ इन लोगो के द्वारा हरी ॐ के उच्चारण के बाद ही यहाँ आते हैं जो शायद इनके प्रतिदिन के अभ्यास के कारण ही हो सका हैं। हरी ॐ के एक बार के उच्चारण से यहाँ सैकड़ों की संख्या में कौवों की फौज भोजन पाने के लिए उमड़ पड़ती हैं। यहाँ पर हर रोज आकर अपना सहयोग देने वाले बताते हैं कि समाज से बहिष्कृत जीवो में कौवे शामिल हैं और शहर में इनके भोजन की समस्या कायम रहती हैं इसलिए वे इनको हमेशा दो समय का भोजन देने की मुहीम से जुड़े हैं।
बाड़मेर के सार्वजनिक श्मशान घाट में प्रतिदिन सुबह और शाम के समय इनके लिए भोजन तैयार होता हैं। कई लोग इनके लिए भोजन तैयार करने के समय यहाँ आते हैं। ऐसा भी नहीं हैं कि ये लोग घर पर बेकार बैठे होने के की वजह से यहाँ पहुँचते हैं बल्कि कई सरकारी नौकरी करने वाले लोग भी यहाँ आते हैं और अपनी सेवा देते हैं। उच्च माध्यमिक विधालय स्टेशन रोड के विज्ञानं प्रयोगशाला शिक्षक प्रतिदिन यहाँ आकर अपने हाथो से श्वानो और कौवों के लिए भोजन बनाते हैं और उन्हें खिलाते हैं। उनके अनुसार इस कार्य में उन्हें आत्मिक शांति की प्राप्ति होती हैं।
पूरे भारत में सार्वजनिक श्मशान घाट के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने वाले बाड़मेर के सार्वजनिक श्मशान घाट में लोगो को इस नेक काम की प्रेरणा पार्षद भवानी सिंह शेखावत से मिल रही हैं। दानदाताओं से लगाकर जीव प्रेमियों तक सभी को वे इन जीवों के लिए काम करने को प्रेरित कर रहे हैं। अब तक दानदाताओं और स्थानीय निकाय की मदद से सार्वजनिक श्मशान घाट में करोड़ो रूपए खर्च कर इसके सौन्दर्य को बढ़ाया गया हैं और इसमें गोशाला, कबूतरों के लिए भोजन की व्यवस्था , कुत्तो के लिए भोजन शाला , और तो और कौवों के लिए भी भोजन की व्यवस्था सब यही पर किया जा रहा हैं। इन प्रयासों को काफी सार्थक रूप से आमजनता का सहयोग भी मिल रहा हैं। क्यूंकि अब तक पूरे विश्व में कही पर भी शमशान घाट में इस तरह के काम शायद की किये जा रहे हैं।
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