Friday, 10 August 2012

बाड़मेर से होनी थी हेरोइन की डील

बाड़मेर से होनी थी हेरोइन की डीलबाड़मेर
जैसलमेर स्थित एक होटल में छापा मारकर आठ किलो हेरोइन के साथ चार जनों को गिरफ्तार किया गया लेकिनसूत्रों के अनुसार इनकी योजना बाड़मेर में ये सारी डील करने की थी , बुधवार को एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉयड (एटीएस) ने जैसलमेर स्थित एक होटल में छापा मारकर आठ किलो हेरोइन के साथ चार जनों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से 4.35 लाख रूपए, एक कार व जीप भी बरामद किए गए हैं। आरोपियों में से तीन व्यक्ति पंजाब और एक जैसलमेर का है। पूरी आशंका है कि जब्त हेरोइन सीमा पार से आई और इसकी आपूर्ति पंजाब में की जानी थी।
एडीजी (एटीएस) आलोक त्रिपाठी के अनुसार एटीएस को सीमा पार से मादक पदार्थो की खेप जैसलमेर आने की सूचना मिली। जिसकी डिलीवरी लेने के लिए पंजाब के तरनतारन से तीन व्यक्ति कार में सवार होकर सुबह जैसलमेर पहुंचे और एक होटल में ठहरे।
संदेह होने पर एटीएस ने उसका पीछा किया और मौका देखकर होटल के कमरे में छापा मारा। वहां से पंजाब के तरनतारन निवासी कमरपाल सिंह (35), गुरदीप सिंह (69) व परमजीत सिंह (46) तथा जैसलमेर के करमावली निवासी जाम खान (30) पुत्र अतार खान को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से आठ किलो हेरोइन, 4.35 लाख रूपए भी बरामद किए गए। एटीएस का दावा है कि अति उच्च क्वालिटी वाली यह हेरोइन सीमा पार से आई है। इस मामले में दो-तीन अन्य व्यक्ति भी शामिल हो सकते हैं। जिनकी तलाश जारी है। इस सम्बन्ध में जैसलमेर कोतवाली थाने में मामला दर्ज किया गया है।
सूत्रों के अनुसार पंजाब के दोनों व्यक्तियों को हेरोइन की डिलीवरी बाड़मेर जिले में किसी स्थान पर होनी थी। जिसकी जानकारी एटीएस को मिल गई, लेकिन इसका पता तस्करों को लग गया और उन्होंने बाड़मेर के स्थान पर जैसलमेर में डील का निर्णय किया। आठ किलो हेरोइन के साथ गिरफ्तार किए चारों आरोपियो से गुरूवार को विभिन्न एजेंसियां पूछताछ मे जुटी रही। एंटी टेरेरिस्ट स्कवायर्ड व पुलिस के अलावा सीमा सुरक्षा बल, इंटेलिजेंस ब्यूरो व सतर्कता एजेंसियो ने गिरफ्तार चारो आरोपियो से संयुक्त पूछताछ जारी रखी और महत्वपूर्ण जानकारियां खंगालने का प्रयास किया। एटीएस सूत्रो के अनुसार हेरोइन जैसलमेर में पाकिस्तान से आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
यह आशंका जताई जा रही है कि सीमा पार से जैसलमेर लाई गई इस हेरोइन की आपूर्ति पंजाब मे की जानी थी , और यह तय था की डील बाड़मेर में कहीं होनी थी । इससे पूर्व पंजाब के दोनो व्यक्तियो को हेरोइन की डिलीवरी बाड़मेर जिले मे किसी स्थान पर होनी थी, जिसकी जानकारी एटीएस को मिल गई थी, लेकिन इसका पता तस्करो को लग गया और उन्होने बाड़मेर की जगह जैसलमेर मे डील करने का निर्णय किया। जैसलमेर में होने वाली इस 'डील' की भनक भी एटीएस को लग गई थी।
बाड़मेर से पूर्व में आई थी 60 किलो हेरोइन
याद रहे वर्ष सितम्बर 2009 में बाड़मेर सीमा से होकर साथ किलो हेरोइन आने की बात तस्कर सोढा खान ने पूछताछ के दौरान आनी बताई थी , और यारु खान के पास पचास किलो हेरोइन पकड़ी भी गई थी हालांकि दस किलो हेरोइन का अब तक कोई पता नहीं चला ।
पांच बार खेप आई गोला-बारूद और हेरोइन की
कुख्यात तस्कर सोढा खान के अनुसार बाड़मेर में पक़डी गई खेप तो पांचवीं थी। पुलिस के हत्थे चढ़े गोला-बारूद के तस्कर और बब्बर खासला के दो आतंकियों से अब तक की पूछताछ ने राजस्थान पुलिस के हाथ-पांव फुला दिएथे । पश्चिमी सीमा पर ब़ाडमेर के पास बरामद गोला-बारूद का जखीरा तो पांचवीं खेप थी। इससे पहले चार खेप वे आतंकियों तक पहुंचा चुके थे । पांचवीं खेप की डिलीवरी के वक्त पुलिस के हत्थे चढ़े तस्कर सोढ़ा खान और इससे जु़डे दूसरे तस्करों से पूछताछ में यह खुलासा हुआ था । सोढा खान से पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि सबसे पहले मार्च 2009 में उसने माल की डिलीवरी रामदा को की थी। गुजरात का तस्कर रामदा फिलहाल गुजरात की ही जेल में बंद है। यह माल पाकिस्तान के आलिया के आदेश पर फोटिया लेकर आया था। दूसरी बार आलिया ने फिर सामान भिजवाया।
आलिया की कॉल पर सोढा ने माल की डिलीवरी मुबारक को की थी, तीसरी बार डिलीवरी लेने शेरू आया था, चौथी बार फिर सोढ़ा ने मुबारक को माल डिलीवर किया था। अब करीब साढ़े तीन साल इस मामले के बीतने के बाद भी पुलिस की नई मुसीबत अब जखीरे की वे चार खेप हैं, जो उसकी पहुंच से बाहर है। पुलिस अब भी बब्बर खालसा के आंतकी हरजोत की तलाश कर रही है। पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली कि पिछली चार खेप की डिलीवरी मुबारक और शेरू ने हरजोत को की थी, लेकिन तबाही के सामान और आतंक के नेटवर्क के खुलासे में पुलिस की ब़डी अ़डचन है कोड नेम।
आईएसआई ने अपने गुर्गो की पहचान छुपाने के लिए कोड नाम दे रखा है। सोढा खान ने पूछताछ में बताया कि यदि उसके और दूसरे तस्कर खानिया में समझौता नहीं होता, तो शायद गोला-बारूद की पांचवीं खेप पुलिस को नहीं मिल पाती। इस पूछताछ में एक और खुलासा हुआ है। अब भारत में गोला-बारूद की डिलीवरी के लिए पाकिस्तान में बैठे उनके आकाओं ने रूट बदल दिया है। पहले वे डिलीवरी जम्मू-कश्मीर और पंजाब बॉर्डर से होती थी, लेकिन वहां सख्ती बढ़ने पर अब ब़ाडमेर-जैसलमेर से माल परमजीत सिंह उर्फ पम्मा की मॉनीटरिंग में हो रहा था। बाबर खालसा का आतंकी परमजीत सिंह उर्फ पम्मा अब लन्दन में बैठा हुआ हैं ।

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