105 विधायकों ने नहीं पूछा एक भी सवाल
जयपुर। सत्र ना जुड़ा हो फिर भी विधायक सवाल पूछ सकते हैं। करीब दो दशक पहले विधायकों ने यह अधिकार तो ले लिया लेकिन उसका इस्तेमाल करना जरूरी नहीं समझा। हाल यह है कि 7 वें और 8वें सत्र के बीच 200 में से 105 विधायकों ने एक भी प्रश्न नहीं किया। 8 वां सत्र बजट सत्र था। विधानसभा सचिवालय ने इस दौरान पूछे गए प्रश्नों के संग ही अंत: सत्र का लेखाजोखा भी तैयार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि 200 में से 105 विधायकों ने 6 महीने में एक भी प्रश्न पूछने की जहमत नहीं उठाई। घनश्याम तिवाड़ी और गुलाबचंद कटारिया सरीखे विपक्ष के बड़े नेताओं के नाम भी इनमें शुमार हैं। विधानसभा उपाध्यक्ष बने रामनारायण मीणा का रिकॉर्ड ही सबसे अच्छा रहा जिन्होंने 13 सवाल किए। दो अन्य विधायक फूलचंद भिण्डा व कल्याण सिंह चौहान ने अंत: सत्र में 10 से ज्यादा सवाल पूछे।
सिर्फ 45 जागरूक
सीएम, मंत्री, संसदीय सचिव, विधानसभा अध्यक्ष, सरकारी मुख्य सचेतक, उप मुख्य सचेतक को छोड़ दें तो सिर्फ 45 विधायकों ने ही 6 महीने में सरकार से प्रश्न किए। विधानसभा उपाध्यक्ष का चुनाव बजट सत्र में हुआ इसलिए उन्होंने सत्र से पहले की अवधि में प्रश्न पूछने का अधिकार इस्तेमाल किया।
1991 में मिला अधिकार
विधायकों की मांग पर तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष हरिशंकर भाभड़ा को अंत: सत्र में भी प्रश्न पूछने के अधिकार का श्रेय जाता है। 19 मार्च 1991 में उन्होंने यह व्यवस्था की। जिसमें दो सत्रों के बीच में भी सवाल पूछे जा सकते हैं।
105 विधायकों का ग्राफ शून्य : अंजू खंगवाल, अनिता भदेल, अनिल जैन, अभिषेक मटोरिया, अर्जुनलाल , अलाउद्दीन आजाद, अशोक पींचा, आदराम मेघवाल, ओ.पी.यादव, ओटाराम देवासी, कमल बैरवा, कमसा मेघवाल, करण सिंह राठौड़, कानसिंह कोटडी, कृष्णेन्द्र कौर, केसाराम चौधरी, कैलाश चंद मीणा, कैलाश चंद त्रिवेदी, कैलाश चंद भंसाली, गंगाबेन गरासिया, गंगादेवी, गंगासहाय शर्मा, गजेन्द्र सिंह खींवसर, गणेशसिंह परमार, गुलाब चंद कटारिया, गोपाल जोशी, गोपाल मीणा, ग्यारसा राम कोली, घनश्याम तिवाड़ी, चंद्रकांता मेघवाल, छोटूसिंह भाटी, जकिया, जगसीराम, जाकिर हुसैन, जीवाराम चौधरी, ज्ञानचंद पारख, ज्ञानदेव आहूजा, टीकाराम जूली, दौलतराज समेजा, नगराज मीणा, नंदलाल मीणा, नाथूराम सिनोदिया, निर्मला सहरिया, पदमाराम मेघवाल, पानाचंद मेघवाल, पुष्कर लाल, पुष्पेन्द्र सिंह, पूराराम चौधरी, प्रकाश चंद्र चौधरी, प्रतापसिंह खाचरियावास, प्रमोद जैन, प्रेमचंद नागर, प्रोमिला कुण्डेरा, फतहसिंह, बहादुर सिंह, बाबूलाल खराड़ी, बाबूसिंह राठौड़, भंवरू खान, भगराज चौधरी, भगवान सहाय सैनी, भवानीसिंह राजावत, मंगलाराम गोदारा, मदन प्रजापत, मदनलाल वर्मा, मलखान सिंह, महावीर प्रसाद जीनगर, महेन्द्र चौधरी, महेन्द्र सिंह, मानसिंह, मेवाराम जैन, मोहन लाल गुप्ता, बसंती देवी मीणा, रमेश खण्डेलवाल, राइया मीणा, रााजपाल सिंह शेखावत, राजेन्द्र राठौड़, रामलाल गुर्जर, रामलाल मेघवाल, रामहेत सिंह, रीटा कुमारी, रूपाराम डूडी, लालशंकर घाटिया, वासुदेव देवनानी, विजय बंसल, विटलशंकर अवस्थी, विश्वनाथ मेघवाल, शंकरलाल बैरवा, शंकरलाल अहारी, शंकर सिंह रावत, शाले मोहम्मद, शिवजीराम मीणा, संजना आगरी, संतोष कुमार सहारण, सिद्धी कुमारी, सुखराम, सुखाराम नेतडिया, सुन्दर लाल, सुरेन्द्र कुमार, सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत, कर्नल सोनाराम चौधरी, सूरजभान, हनुमान बेनीवाल, हबीबुर्रहमान, हरिसिंह रावत, हाजी मकबूल मंडेलिया।
हर हफ्ते एक सवाल
7 वां सत्र 29 अगस्त 11 को खत्म हुआ था और 8 वां सत्र 27 फरवरी को शुरू हुआ था। अंत: सत्र में प्रत्येक विधायक को हर सप्ताह एक सवाल पूछने का अधिकार है। इस तरह हर विधायक 25 सवाल पूछ सकता था।
इन्होंने दागे प्रश्न
उदयलाल आंजना-3 प्रश्न, अजय सिंह-1, अनिता सिंह-1, अब्दुल सगीर खान-2, अमराराम-1, अर्जुन सिंह बामनिया-2, अशोक डोेगरा-1, अशोक परनामी-2, ओमप्रकाश जोशी-1, ओम बिड़ला-8, कमला कस्वा-1, कल्याण सिंह चौहान-13, कांता गरासिया-1, कालीचरण सराफ-4, किरण माहेश्वरी-6, गंगाजल मील-1, गोविन्द सिंह डोटासरा 3, जसवंत सिंह यादव-1, डा.दिगम्बर सिंह 1, देवीसिंह भाटी-2, नरपत सिंह राजवी-1, नवलकिशोर मीणा-1, निर्मल कुमावत-3, डा.परमनवदीप सिंह-2, पवन दुग्गल-4, पेमाराम 8, प्रदीप कुमार सिंह-2, प्रभुलाल सैनी-2, फूलचंद भिण्डा-13, बंशीधर खण्डेला-6, बनवारी लाल सिंघल-5, बाबूलाल बैरवा-1, रणवीर पहलवान-8, रवीन्द्र सिंह बोहरा-1, राजकुमार रिणवा-1, राधेश्याम गंगानगर-1, रामनारायण मीणा-16, राव राजेन्द्र सिंह-2, रोहिणी कुमारी-2, रोेहिताश्व कुमार-1, श्रवण कुमार-1, सज्जन कटारा-2, सी.एल.प्रेमी-1, सूर्यकांता व्यास-2, हेमसिंह भडाना-1 प्रश्न।
| विधायक क्यों बने तो ? |
जयपुर। सत्र ना जुड़ा हो फिर भी विधायक सवाल पूछ सकते हैं। करीब दो दशक पहले विधायकों ने यह अधिकार तो ले लिया लेकिन उसका इस्तेमाल करना जरूरी नहीं समझा। हाल यह है कि 7 वें और 8वें सत्र के बीच 200 में से 105 विधायकों ने एक भी प्रश्न नहीं किया। 8 वां सत्र बजट सत्र था। विधानसभा सचिवालय ने इस दौरान पूछे गए प्रश्नों के संग ही अंत: सत्र का लेखाजोखा भी तैयार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि 200 में से 105 विधायकों ने 6 महीने में एक भी प्रश्न पूछने की जहमत नहीं उठाई। घनश्याम तिवाड़ी और गुलाबचंद कटारिया सरीखे विपक्ष के बड़े नेताओं के नाम भी इनमें शुमार हैं। विधानसभा उपाध्यक्ष बने रामनारायण मीणा का रिकॉर्ड ही सबसे अच्छा रहा जिन्होंने 13 सवाल किए। दो अन्य विधायक फूलचंद भिण्डा व कल्याण सिंह चौहान ने अंत: सत्र में 10 से ज्यादा सवाल पूछे।
सिर्फ 45 जागरूक
सीएम, मंत्री, संसदीय सचिव, विधानसभा अध्यक्ष, सरकारी मुख्य सचेतक, उप मुख्य सचेतक को छोड़ दें तो सिर्फ 45 विधायकों ने ही 6 महीने में सरकार से प्रश्न किए। विधानसभा उपाध्यक्ष का चुनाव बजट सत्र में हुआ इसलिए उन्होंने सत्र से पहले की अवधि में प्रश्न पूछने का अधिकार इस्तेमाल किया।
1991 में मिला अधिकार
विधायकों की मांग पर तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष हरिशंकर भाभड़ा को अंत: सत्र में भी प्रश्न पूछने के अधिकार का श्रेय जाता है। 19 मार्च 1991 में उन्होंने यह व्यवस्था की। जिसमें दो सत्रों के बीच में भी सवाल पूछे जा सकते हैं।
105 विधायकों का ग्राफ शून्य : अंजू खंगवाल, अनिता भदेल, अनिल जैन, अभिषेक मटोरिया, अर्जुनलाल , अलाउद्दीन आजाद, अशोक पींचा, आदराम मेघवाल, ओ.पी.यादव, ओटाराम देवासी, कमल बैरवा, कमसा मेघवाल, करण सिंह राठौड़, कानसिंह कोटडी, कृष्णेन्द्र कौर, केसाराम चौधरी, कैलाश चंद मीणा, कैलाश चंद त्रिवेदी, कैलाश चंद भंसाली, गंगाबेन गरासिया, गंगादेवी, गंगासहाय शर्मा, गजेन्द्र सिंह खींवसर, गणेशसिंह परमार, गुलाब चंद कटारिया, गोपाल जोशी, गोपाल मीणा, ग्यारसा राम कोली, घनश्याम तिवाड़ी, चंद्रकांता मेघवाल, छोटूसिंह भाटी, जकिया, जगसीराम, जाकिर हुसैन, जीवाराम चौधरी, ज्ञानचंद पारख, ज्ञानदेव आहूजा, टीकाराम जूली, दौलतराज समेजा, नगराज मीणा, नंदलाल मीणा, नाथूराम सिनोदिया, निर्मला सहरिया, पदमाराम मेघवाल, पानाचंद मेघवाल, पुष्कर लाल, पुष्पेन्द्र सिंह, पूराराम चौधरी, प्रकाश चंद्र चौधरी, प्रतापसिंह खाचरियावास, प्रमोद जैन, प्रेमचंद नागर, प्रोमिला कुण्डेरा, फतहसिंह, बहादुर सिंह, बाबूलाल खराड़ी, बाबूसिंह राठौड़, भंवरू खान, भगराज चौधरी, भगवान सहाय सैनी, भवानीसिंह राजावत, मंगलाराम गोदारा, मदन प्रजापत, मदनलाल वर्मा, मलखान सिंह, महावीर प्रसाद जीनगर, महेन्द्र चौधरी, महेन्द्र सिंह, मानसिंह, मेवाराम जैन, मोहन लाल गुप्ता, बसंती देवी मीणा, रमेश खण्डेलवाल, राइया मीणा, रााजपाल सिंह शेखावत, राजेन्द्र राठौड़, रामलाल गुर्जर, रामलाल मेघवाल, रामहेत सिंह, रीटा कुमारी, रूपाराम डूडी, लालशंकर घाटिया, वासुदेव देवनानी, विजय बंसल, विटलशंकर अवस्थी, विश्वनाथ मेघवाल, शंकरलाल बैरवा, शंकरलाल अहारी, शंकर सिंह रावत, शाले मोहम्मद, शिवजीराम मीणा, संजना आगरी, संतोष कुमार सहारण, सिद्धी कुमारी, सुखराम, सुखाराम नेतडिया, सुन्दर लाल, सुरेन्द्र कुमार, सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत, कर्नल सोनाराम चौधरी, सूरजभान, हनुमान बेनीवाल, हबीबुर्रहमान, हरिसिंह रावत, हाजी मकबूल मंडेलिया।
हर हफ्ते एक सवाल
7 वां सत्र 29 अगस्त 11 को खत्म हुआ था और 8 वां सत्र 27 फरवरी को शुरू हुआ था। अंत: सत्र में प्रत्येक विधायक को हर सप्ताह एक सवाल पूछने का अधिकार है। इस तरह हर विधायक 25 सवाल पूछ सकता था।
इन्होंने दागे प्रश्न
उदयलाल आंजना-3 प्रश्न, अजय सिंह-1, अनिता सिंह-1, अब्दुल सगीर खान-2, अमराराम-1, अर्जुन सिंह बामनिया-2, अशोक डोेगरा-1, अशोक परनामी-2, ओमप्रकाश जोशी-1, ओम बिड़ला-8, कमला कस्वा-1, कल्याण सिंह चौहान-13, कांता गरासिया-1, कालीचरण सराफ-4, किरण माहेश्वरी-6, गंगाजल मील-1, गोविन्द सिंह डोटासरा 3, जसवंत सिंह यादव-1, डा.दिगम्बर सिंह 1, देवीसिंह भाटी-2, नरपत सिंह राजवी-1, नवलकिशोर मीणा-1, निर्मल कुमावत-3, डा.परमनवदीप सिंह-2, पवन दुग्गल-4, पेमाराम 8, प्रदीप कुमार सिंह-2, प्रभुलाल सैनी-2, फूलचंद भिण्डा-13, बंशीधर खण्डेला-6, बनवारी लाल सिंघल-5, बाबूलाल बैरवा-1, रणवीर पहलवान-8, रवीन्द्र सिंह बोहरा-1, राजकुमार रिणवा-1, राधेश्याम गंगानगर-1, रामनारायण मीणा-16, राव राजेन्द्र सिंह-2, रोहिणी कुमारी-2, रोेहिताश्व कुमार-1, श्रवण कुमार-1, सज्जन कटारा-2, सी.एल.प्रेमी-1, सूर्यकांता व्यास-2, हेमसिंह भडाना-1 प्रश्न।
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