Monday, 21 May 2012

जश्न मनाने को कुछ खास नहीं

मैडम के हाथों की कठपुतली .....
जश्न मनाने को कुछ खास नहीं   

यूपीए-2 के कार्यकाल को सोमवार को तीन साल पूरे हो गए। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश करने के लिए तैयार हैं हालांकि जश्न मनाने के लिए कुछ खास है नहीं। सरकार की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर यूपीए अपने नेताओं के लिए मंगलवार को भोज का आयोजन करेगी।

सरकार का रिपोर्ट कार्ड-
कांग्रेस का मानना है कि लोकसभा चुनाव में दो साल का वक्त है इसलिए जो उपलब्घियां हैं उनका खूब बखान किया जाए भले ही वे सीमित हों। सरकार निर्णय नहीं ले पाने की अपनी छवि से मुक्ति पाने की कोशिश में अपने रिपोर्ट कार्ड में पिछले एक साल में विभिन्न क्षेत्रों में उठाए गए कदमों का उल्लेख करेगी। सरकार के प्रमुख आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु के थोड़ा समय पहले न्यूयार्क में दिए गए बयान से यह बात सामने आ गई थी कि सरकार कड़े फैसले कर पाने में हिचक रही है।

बसु ने कहा था कि प्रमुख सुधार 2014 के बाद ही होंगे। सरकार अपने रिपोर्ट कार्ड के माध्यम से जनता को बताएगी कि उसने भ्रष्टाचार व महंगाई को काबू में लाने के लिए क्या किया। सरकार बताएगी कि खराब वैश्विक परिदृश्य के बावजूद आर्थिक विकास को गति देने के लिए उसने क्या कदम उठाए।

घोटालों से घायल सरकार -
सरकार 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन, कॉमनवेल्थ घोटाला, आदर्श हाउंसिंग जैसे घोटालों से घायल है। इन घोटालों के साथ 2014 के आम चुनाव में उतरना उसके लिए आसान नही होगा। वहीं मौजूदा साल भी यूपीए-2 के लिए विवादों का साल रहा है।

वित्त क्षेत्र की चुनौतियां -
वित्त मंत्रालय रूपए की गिरती कीमत, महंगाई व खाद्य पदार्थो की आसमान छूती कीमतों से परेशान है। वहीं वैश्विकरेटिंग में भी भारत नीचे चला गया है। इन तीन साल में महंगाई दर इकाई से दहाई के आंकड़े पर पहुंची। इसे काबू में लाने की सरकार की सारी नीतियां लगभग फेल हो चुकी हैं। दो जून की रोटी भी जुटाना मुश्किल हो रहा है, वहीं सरकार 32 रूपए प्रतिदिन खर्चने वाले को गरीब मानने को तैयार नहीं है।


गृह मंत्रालय की चुनौतियां -
गृह मंत्री पी चिदंबरम का पसंदीदा प्रोजक्ट एनसीटीसी रोक दिया गया है। आतंकवाद की चुनौतियों से निपटने के लिए एक केंद्रीय एजेंसी का विचार सरकार ने बनाया, लेकिन लगभग 11 राज्यों के सीएम इससे नाखुश हैं। उनका कहना है कि सरकार उनके काम में हस्तक्षेप कर रही है। जबकि आतंकवाद से मुकाबले को ऎसी केंद्रीय एजेंसी जरूरी है। आफ्स्पा, मणिपुर व तेलंगाना भी अनसुलझी समस्याएं हैं।


रक्षा मंत्रालय भी रहा सुर्खियों में -
रक्षा मंत्रालय सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह तथा रक्षा सौदों में भ्रष्टाचार को लेकर विवादों के कारण खबरों में छाया रहा है।

उधर, ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश का प्रमुख भूमि अधिग्रहण बिल राजनीति में फंस गया है। इस पर यूपीए की प्रमुख सहयोगी तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने अड़ंगा लगा दिया है।

यूपीए-1 बनाम यूपीए-2
यूपीए-दो सरकार की तस्वीर यूपीए-एक से एकदम अलग है। जहां यूपीए-1 के रास्ते में वामदल रोड़ा बने थे। वहीं यूपीए-दो को अपनों ने ही परेशान किया। परमाणु करार पर हुए विवाद के चलते जैसे-तैसे वामदलों का साथ छूटा, तो दूसरो कार्यकाल में तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक जैसे सहयोगी दलों ने बार-बार सरकार को झुकाया। पहले कार्यकाल में परमाणु करार ही रोड़ा था, लेकिन दूसरे में 2जी, राष्ट्रमंडल खेल, आदर्श सोसायटी और न जाने कितने घोटाले, जो सरकार को कई बार शर्मसार कर चुके हैं।

अधर में अटका आर्थिक सुधार
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), विनिर्माण क्षेत्र में निवेश और कर संग्रहण में आ रही दिक्कतों को लेकर संसद में गतिरोध जारी है। कई आर्थिक सुधार बिल अटके हुए हैं। विपक्ष इन बिलों को सरकार की मनमर्जी बता रहा है।

खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर सबसे पहले प्रमुख सहयोगी ममता बनर्जी ने ही सरकार को झटका दिया। ममता किसी भी कीमत पर एफडीआई के पक्ष में नहीं हैं। मौका देख ममता के सुर में सुर मिलाया विपक्ष ने।

लोकपाल पर मान-मनौव्वल
अन्ना हजारे मुहिम नहीं छेड़ते, तो शायद ये बिल अब भी सरकार के पास ही रहता। दबाव में लोकसभा में इसे पास करा लिया गया, लेकिन राज्यसभा में विपक्ष की ही चली और बिल अटक गया। 400 से 500 संशोधनों के बाद इसे फिर राज्यसभा में रखा जाएगा।

कब वापस आएगा कालाधन?
दुनिया के बैंकों में भारतीयों का कितना कालाधन है, सरकार दूसरे कार्यकाल में भी ये पता नहीं लगा पाई। विपक्ष के दबाव के चलते दूसरे देशों से कुछ करार हुए और सरकार संसद में श्वेत पत्र जारी करने को राजी हो गई।

सरकार फेल
भ्रष्टाचार में डूबी यूपीए सरकार पूरी तरह फेल हो गई है। नेतृत्व अभाव के चलते इसने लोगों का भरोसा खो दिया है। - भाजपा प्रवक्ता मुख्तार अब्बास नकवी

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