Thursday, 31 May 2012

जल्द बर्बाद होना चाहते हैं तो अपनाइए ये तरीका


जल्द बर्बाद होना चाहते हैं तो अपनाइए ये तरीका
 
 मनीष कुमार (उम्र 35) पिछले दस साल से प्राइवेट फर्म में काम कर रहे हैं। स्ट्रेस और स्टैंडर्ड मेनटेन करने के लिए सिगरेट और तंबाकू का सेवन शुरू कर तो दिया लेकिन वे इसके आदी हो गए। तीन साल पहले मालूम पड़ा कि उन्हें कैंसर है, जो फर्स्ट स्टेज में था।
प्राइमरी स्टेज पर इलाज कराने में करीब दो लाख गवां दिए। असर न पड़ने पर कीमोथैरेपी और आखिर में ऑपरेशन कराना पड़ा। ऑपरेशन में 5 से 6 लाख का खर्च आया। डॉक्टर्स ने उनके लिए विशेष डाइट चार्ट बताया, जिसके लिए महीने में 50 हजार रुपए खर्च हो रहे हैं।
दस साल में उन्होंने 18 लाख रुपए कमाए, जबकि करीब 8 लाख इलाज में इनवेस्ट कर दिए। जबकि सिगरेट व तंबाकू में पिछले दस साल में 1 लाख 50 हजार खर्च किए सो अलग। शहर में ऐसे कई लोग हैं, जो जितना कमा रहे हैं, उसका दस फीसदी हिस्सा तंबाकू और सिगरेट पर इनवेस्ट कर रहे हैं।
एक्सपर्ट के मुताबिक जिस बजट को प्लांड मैनर में बनाकर आप अपनी जिंदगी को सुरक्षा दे सकते हैं, तंबाकू की लत के कारण भविष्य में वह जिंदगी को बचाने के लिए खर्च करना पड़ सकता है। फाइनेंशियल एडवाइजर अनुराग श्रीवास्तव के मुताबिक जितने रुपए युवा अपनी इस लत में खर्च करते हैं, उतने रुपए से अपना बैंक बैलेंस बनाने के साथ ही लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी, प्रॉपर्टी, हेल्थ इंश्योरेंस, कार व रिटायरमेंट के बाद के लिए इन्वेस्टमेंट पॉलिसीज आदि ले सकते हैं।
धुएं में उड़ रही टीनएज

शहर के करीब 60 फीसदी टीनएजर सिगरेट और तंबाकू के आदी हैं। युवा स्मोकिंग को फैशन और स्टेटस सिंबल के रूप में ले रहे हैं। 25 से ज्यादा सिगरेट पीने से ओरल कैंसर का खतरा और बढ़ जाता है। कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ.अक्षय निगम कहते हैं कि दस साल पहले तक हमारे पास दिन में 10 मरीज ही ओरल कैंसर के आते थे, लेकिन आज दिन में 40 से 50 मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें तंबाकू के कारण कैंसर हुआ है।


छुपकर बेच रहे गुटखा

एक अप्रैल को मध्यप्रदेश सरकार ने गुटखे की बिक्री पर रोक लगा दी है। बावजूद इसके शहर में इसकी बिक्री अभी भी जारी है। सूत्रों का कहना है कि ग्वालियर से उत्तरप्रदेश और राजस्थान के जिलों की सीमाएं जुड़ी हुई हैं, जहां से व्यापारी गुटखा लाकर चोरी- छिपे बेच रहे हैं। वहीं सिगरेट कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर आलोक जैन बताते हैं कि शहर में सिगरेट की प्रतिमाह बिक्री तीन करोड़ रुपए की हो रही है।


..तो ही छोड़ पाएंगे लत

स्मोकिंग और तंबाकू की लत छोड़ने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी व्यक्ति का मेंटली स्ट्रांग होना है। नशा मुक्ति केंद्र चला रहे धीरज सोनी कहते हंैं कि अगर किसी को यह आदत छोड़नी है तो उसकी साइकोलॉजिकल काउंसिलिंग सबसे ज्यादा मैटर करती है। यदि ये मेडिकल ट्रीटमेंट की बात करें, तो ओरल मेडिसिन सबसे कारगार है। मेडिकेशन शुरू होने पर डिप्रेशन या स्लीपिंग डिसऑर्डर की शिकायत होती है।


रखें सेल्फ कंट्रोल

ऐसे लोगों से दूर रहें, जो तंबाकू का सेवन करते हैं या सिगरेट पीते हैं। कई बार इनकी स्मेल से ही लोगों को फिर से अट्रेक्शन होने लगता है।

शेड्यूल बिजी रखें ताकि इन आदतों के बारे में सोचने का समय न मिले।

सेल्फ कंट्रोल के लिए एक्सरसाइज और मेडिटेशन अच्छे हैं।


करियर डूब गया

मनोज सिंह डॉक्टर बनना चाहते थे। मेडिकल में सिलेक्शन भी हो गया। एक साल अच्छे से पढ़ाई की, लेकिन तंबाकू की लत के चलते वे हाईपरटेंशन के शिकार हो गए। बीमारी के कारण एक साल तक पढ़ाई से ब्रेक लिया। दिमाग पर ज्यादा जोर न पड़े, इसके लिए फिलहाल बीए कर रहे हैं। वे कहते हैं कि अब अपना ही कोई बिजनेस शुरू करेंगे।



जॉब छोड़नी पड़ी

विनय श्रीवास्तव 20 साल की उम्र से तंबाकू का सेवन करते आ रहे थे। यह उनका शौक मात्र था, मैनेजमेंट करके एक एमएनसी कंपनी में जॉब मिल गई।12 साल लगातार तंबाकू खाने से उन्हें कैंसर हो गया। इलाज कराने के बाद मुंह में टेढ़ापन भी आ गया। शर्म के कारण उन्होंने एमएनसी छोड़ दी और अब मात्र 10 हजार की जॉब कर रहे हैं।


जब हुआ शर्मिदा

प्राइवेट बैंक के ब्रांच मैनेजर सुनील मिश्रा (परिवर्तित नाम) पिछले 20 साल से लगातार तंबाकू खा रहे हैं। उनके अनुसार वे दिन में 15 पाउच तंबाकू लेते थे। एक दिन उनके दस साल के बेटे सुदीप ने अपने जन्मदिन पर गिफ्ट के तौर पर श्री मिश्रा से तंबाकू न खाने का प्रॉमिस लिया। बेटे की बात नकार नहीं सकते थे, इसलिए तंबाकू लेना छोड़ दिया।


चेतावनी दी तब छोड़ी

रामनिवास कहते हैं कि मुझे पिछले 20 साल से डायबिटीज है। साथ ही स्मोकिंग की भी लत पड़ गई थी। हर दो घंटे में एक सिगरेट पीता था। छह महीने पहले सीने में दर्द हुआ। जांच में पता चला कि अटैक के चांसेज हैं। डॉक्टर ने चेतावनी दी कि सिगरेट नहीं छोड़ी तो जल्द ही अटैक आ सकता है। उसी दिन से सिगरेट से तौबा कर ली।

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