Tuesday, 22 May 2012

लघुकथा तुझे पिज्जा तक जानू

भुवनेश तिवाड़ी  
 
लाल रंग की छोटी फ्राक पहने लाइटों से जगमगाते खामोश तीन सितारा होटल के रेस्तरां में बैठी हसीन लड़की की वो आवाजे ना चाहते हुए भी लोगों का ध्यान भंग कर रही थी। जानू तुम देखो ना मेरी नई फ्राॅक कैसी है, जानू ये मुझे पापा ने दी है मेरे बर्थडे पर, जानू उस दिन साथ आईसक्रीम खाई थी वो याद है कितनी टेस्टी थी, जानू तुम्हे वो बात याद है.....जानू आई लव यू...लव यू डार्लिंग...जानू ये जानू वो जानू, जानू , जानू वगैरह वगैरह। जैसे ही लड़की लड़के को संबोधित करती रेस्तरां में बैठे सभ्य वर्ग के लोग उसे देखने लगते। लड़का धीमे से बुदबुदाता और इधर-उधर से देख रहे लोगों को देखकर चुप हो जाता। चाहकर भी लोग लड़के की आवाज नहीं सुन पा रहे थे। अचानक बैरा आ गया जिसके ट्रे में पिज्जा, कोक, चाउमीन जैसी कई चीजें थी। टेबल पर सारी चीजें सर्व कर दी गई थी, अब धीरे धीरे जानू का संबोधन कम होता जा रहा था। लड़की खाने में मशगूल थी, लड़का कुछ सोच में डूबा हुआ था। टेबल पर रखी चीजें खत्म होते ही लड़के ने लड़की से कुछ कहना चाहा उसके मुहं से शब्द निकला ही था जानू....तभी लड़की तपाक से बोली रोहन मुझे कोई जरूरी काम से जाना है, तू बिल पे करके अपने काम पर निकल जाना...

लघुकथा
तुझे पिज्जा तक जानू

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