दर्दनाक मौत! गेहूं के ड्रम में मिले तीन बहनों के शव
यहां से करीब दस किलोमीटर दूर ग्राम अमलेटा में तीन बालिकाओं की संदिग्ध मौत हो गई। ज्योति (12), महालक्ष्मी (8) तथा रानू (4) के शव रविवार सुबह उनकी नानी श्यामाबाई के यहां गेहूं के ड्रम में मिले।
पुलिस के अनुसार पिता परमानंद पांचाल और मां राजूबाई के मजदूरी पर चले जाने के बाद बालिकाएं शनिवार दोपहर 4 बजे नानी श्यामाबाई के यहां खेलने आई थीं। बालिकाओं को खाना परोसकर 4.30 बजे श्यामाबाई पास ही रहने वाली भतीजी रामकन्या के यहां चली गई। करीब डेढ़ घंटे बाद लौटी तो बालिकाएं घर में नहीं थीं। रात 8 बजे तक बालिकाएं नहीं मिलीं तो उन्हें ढूंढना शुरू किया। रात 2.30 बजे नामली थाने पर गुमशुदगी दर्ज करवाई।
रविवार सुबह श्यामाबाई ने आटा रखने के लिए गेहूं के ड्रम का ढक्कन खोला तो तीनों की लाश मिली। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम की शॉर्ट रिपोर्ट के मुताबिक बालिकाओं की मौत दम घुटने से हुई है। शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं।
सवालों के घेरे में दुर्घटना : बच्चियां ड्रम में कैसे पहुंचीं
कैसे समाएंगे तीन बच्चे : दुर्घटना सवाल खड़े करती है। ड्रम में गेहूं थे। उसमें खाली जगह इतनी नहीं थी कि तीनों बालिकाएं आसानी से समा जाएं। मृतका 12 वर्षीय ज्योति की ऊंचाई करीब साढ़े तीन फीट, महालक्ष्मी की करीब पौने तीन फीट और रानू की करीब ढाई फीट है। ड्रम की ऊंचाई 35 इंच (करीब 3 फीट) है। इसमें से 14 इंच तक गेहूं थे। 25 इंच व्यास के इस ड्रम में 21 इंच जगह थी। दो फीट से कम जगह में तीनों बालिकाएं कैसे समाई यह जांच का विषय है।
परिजन को शक नहीं : बालिकाओं के पिता परमानंद और नानी श्यामाबाई से भास्कर ने चर्चा की तो दोनों का कहना था किसी से दुश्मनी नहीं है। किसी पर शक नहीं कर सकते हैं।
बेहोश कर ड्रम में डालने की शंका
यह जांच का विषय है कि बालिकाएं ड्रम के अंदर तक पहुंचीं कैसे? इसी से तय होगा। यह हत्या है या दुर्घटना। बालिकाओं के शरीर पर किसी तरह के संघर्ष के निशान नहीं हैं। उन्हें बेहोश कर ड्रम में डालने की शंका में जांच के लिए विसरा भेजा है। जांच एसडीओपी पी.आर. बरसेना को सौंपी है। -डॉ. रमनसिंह सिकरवार, एसपी रतलाम
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