बाड़मेर कलेक्ट्रेट में ये क्या हो रहा हैं ?
सरकारी दफ्तरों में क्या नही होता ? आप सोच रहे होंगे कि आम जनता के काम के अलावा और क्या होता होगा लेकिन जनाब इन दिनों बाड़मेर कलेक्ट्रेट का नाम पानी की बर्बादी के कारण उछल रहा हैं !जल है तो कल है, जल ही जीवन है का नारा कागजों तक ही सिमटकर रह गया है। एक ओर जहां कई लोग एक-एक बूंद पानी के लिए तडफ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लोग भारी मात्रा में पानी की बर्बादी की जा रही है। इसमें कलेक्ट्रेट भी पीछे नहीं है, जहां रोजाना टंकियों से सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। ग्रर्मी के इस मौसम में जिले के अनेक शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के लिए हाहाकार जैसी स्थिति है। नल के सामने घंटो इंतजार के बाद लोगों को ले देकर पानी मिल रहा है। इसके बावजूद पानी की बर्बादी थम नहीं रही है।
विडंबना यह है कि पानी का महत्व जिला प्रशासन भी नहीं समझ पा रहा है। कलेक्ट्रेट की छत में पानी की कई टंकिया लगाई गई हैं, जिनसे रोजाना सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। पानी की मोटर का स्विच बंद करने के लिए यहां एक भी आदमी नहीं है, जिसके कारण टंकियों से बर्बादी निरंतर जारी है। हर बार हर वार को छत की टंकियों से घंटों पानी बहता रहता हैं ।
सरकारी दफ्तरों में क्या नही होता ? आप सोच रहे होंगे कि आम जनता के काम के अलावा और क्या होता होगा लेकिन जनाब इन दिनों बाड़मेर कलेक्ट्रेट का नाम पानी की बर्बादी के कारण उछल रहा हैं !जल है तो कल है, जल ही जीवन है का नारा कागजों तक ही सिमटकर रह गया है। एक ओर जहां कई लोग एक-एक बूंद पानी के लिए तडफ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लोग भारी मात्रा में पानी की बर्बादी की जा रही है। इसमें कलेक्ट्रेट भी पीछे नहीं है, जहां रोजाना टंकियों से सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। ग्रर्मी के इस मौसम में जिले के अनेक शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के लिए हाहाकार जैसी स्थिति है। नल के सामने घंटो इंतजार के बाद लोगों को ले देकर पानी मिल रहा है। इसके बावजूद पानी की बर्बादी थम नहीं रही है।
विडंबना यह है कि पानी का महत्व जिला प्रशासन भी नहीं समझ पा रहा है। कलेक्ट्रेट की छत में पानी की कई टंकिया लगाई गई हैं, जिनसे रोजाना सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। पानी की मोटर का स्विच बंद करने के लिए यहां एक भी आदमी नहीं है, जिसके कारण टंकियों से बर्बादी निरंतर जारी है। हर बार हर वार को छत की टंकियों से घंटों पानी बहता रहता हैं ।
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