फिल्म समीक्षा : धारदार नहीं है रामू की 'डिपार्टमेंट'
रामगोपाल वर्मा की 'डिपार्टमेंट' उतना असर नहीं छोड़ पाई, जितनी उम्मीद की जा रही थी। कहानी नई नहीं हैं लेकिन कुल मिलाकर बेहतर है। रामू फिल्म को उठाने में कामयाब दिखाई नहीं देते हैं। फिल्म को रामू की बेवजह की तकनीक और एक्सपेरिमेंट्स नीचे की ओर ले जाते हैं। रामू का ध्यान आइटम सॉन्ग पर तो दिखाई देता है लेकिन फिल्म पर से उनकी पकड़ छूटती दिखाई पड़ती है। रामू अंडरवर्ल्ड पर पहले भी हाथ आजमा चुके हैं, ऐसे में उनसे और बेहतर की उम्मीद थी।
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रामगोपाल वर्मा की फिल्म 'डिपार्टमेंट'की कहानी कुल मिलाकर पुलिस डिपार्टमेंट के कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर आतंक और गुंडाराज को खत्म करने की कहानी है। कहानी में मुख्यमंत्री, ग्रह सचिव और डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस एक 'डिपार्टमेंट' बनाते हैं, जो अंडरवर्ल्ड के आतंक को मिटाने के लिए काम करता है। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट महादेव भोसले (संजय दत्त) इस विभाग को लीड करते हैं लेकिन वह ईमानदार नहीं है। विभाग में शिव नारायण(राणा डग्गुबती) साफ छवि के पुलिस ऑफिसर हैं। यहां से शुरू होता है दोनों के बीच पावर का खेल। महादेव और शिव के बीच की लड़ाई का लाभ भ्रष्ट नेता गायकवाड (अमिताभ बच्चन) उठाने लगता है।
स्टोरी ट्रीटमेंट
फिल्म के स्टोरी ट्रीटमेंट पर तकनीक हावी होती दिखाई देती है। फिल्म शुरुआत में रफ्तार पकड़ती है लेकिन बाद में लूज पड़ जाती है। कई जगह कहानी टुकडों में बिखरती है और बेअसर साबित हो जाती है।
अभिनय
अमिताभ बच्चन की अदाकारी वाकई देखने लायक है। फिल्म में वह अपने किरदार में अन्य कलाकारों पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। संजय दत्त और राणा डग्गुबती की एक्टिंग धारदार नजर नहीं आती है। दीपक तिजोरी अपने रोल में खास असर नहीं छोड़ पाए हैं। विजय राज ने कुछ बेहतर काम किया है जबकि मधु शालिनी औसत नजर आती हैं।
निर्देशन
अंडरवर्ल्ड की दुनिया पर रामगोपाल वर्मा 'कंपनी' और 'सरकार' जैसी फिल्मों के जरिए अपना हाथ साफ कर चुके हैं। लेकिन 'डिपार्टमेंट' में उनका निर्देशन बेअसर साबित हुआ है। उनसे कुछ बेहतर की उम्मीद थी। कुछ अलग तकनीक अपनाने के चक्कर में रामू का निर्देशन फिल्म को बांधने में नाकाम रहा है। फिल्म में बेवजह के एक्शन सीन्स फिल्म को कमजोर बनाते हैं।
संगीत/संवाद
फिल्म का संगीत औसत दर्जे का ही है। धरम संदीप, बप्पा लाहिरी और विक्रम नागी के संगीत में तालमेल का अभाव साफ देखा जा सकता है। वैसे फिल्म में संगीत के लिए ज्यादा गुंजाइश भी नहीं थी। रिमिक्स सॉन्ग 'थोड़ी सी जो पी ली है' और नतालिया कौर का आइटम सॉन्ग भी छाप छोड़ने में नाकाम रहा है। जहां तक फिल्म में संवादों की बात की जाए तो ये फिल्म को उठाने वाले लगते हैं लेकिन ऐसा सब जगह नहीं है।
सिनेमेटोग्राफी/एडिटिंग
राम गोपाल की इस फिल्म में सिनेमेटोग्राफी कुछ ज्यादा दमदार नजर नहीं आती है। कुछ अलग करने के चक्कर में एडिटिंग भी गड़बड़ा गई है।
फिल्म क्यूं देखें
महानायक अमिताभ बच्चन की अदाकारी के लिए डिपार्टमेंट को देखा जा सकता है। इसके अलावा क्राइम और एक्शन के दीवाने लोगों को फिल्म कुछ हद तक अच्छी लग सकती है।
फिल्म : डिपार्टमेंट
निर्माता और निर्देशक : रामगोपाल वर्मा
जॉनर : एक्शन/क्राइम ड्रामा
संगीत निर्देशक : धरम संदीप, बप्पा लाहिरी, विक्रम नागी
कलाकार :
अमिताभ बच्चन, संजय दत्त, राणा डग्गुबती, नतालिया कौर, मधु शालिनी, विजय राज, अभिमन्यु शेखर सिंह, लक्ष्मी मंचु, दीपक तिजोरी
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