| हर साल इसी बच्चे की तरह खाने की तरफ ताकती आँखे मूँद जाती हैं |
भारत में हर साल लाकों बच्चे भूख से मरते हैं , लाखो को दो जून का भोजन नहीं मिलता लेकिन फिर भी इंडियन प्रीमियम लीग करवाने के नाम पर करोडो रुपये खर्चा करने जरुरी हैं क्यों ? क्या सरकार को इस तरफ सोचने की फुर्सत नहीं या फिर योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया के बयानों पर प्राईम टाइम में तैंतीस रुपए वाला अमीर मुद्दे पर बहस करने से फुर्सत नहीं मिलती !
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