Sunday, 20 May 2012

हर साल इसी बच्चे की तरह खाने की तरफ ताकती आँखे मूँद जाती हैं


huge fire engulfed a shanty town destroying homes
हर साल इसी बच्चे की तरह खाने की तरफ ताकती आँखे मूँद जाती  हैं 

भारत में हर साल लाकों बच्चे भूख से मरते हैं , लाखो को दो जून का भोजन नहीं मिलता लेकिन फिर भी इंडियन प्रीमियम लीग करवाने के नाम पर करोडो रुपये खर्चा करने जरुरी हैं क्यों ? क्या सरकार को इस तरफ सोचने की फुर्सत नहीं या फिर योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया के बयानों पर प्राईम टाइम में तैंतीस रुपए वाला अमीर मुद्दे पर बहस करने से फुर्सत नहीं मिलती ! 

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